तावड़ू। पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने नूंह जिले के रीगड़ गांव निवासी अरमान को अवैध हिरासत में रखने और पुलिस यातना देने के आरोपों पर कड़ा रुख अपनाया है। अदालत ने हरियाणा सरकार और पुलिस अधिकारियों से 15 सितंबर तक विस्तृत स्टेटस रिपोर्ट पेश करने के आदेश दिए हैं। मामले की अगली सुनवाई 15 सितंबर को होगी।
मामला एक गुमशुदा युवती से जुड़ा था लेकिन युवती ने अदालत में बयान देकर साफ कर दिया कि उसकी गुमशुदगी से अरमान का कोई संबंध नहीं है। इसके बावजूद उसे हिरासत में रखने का आरोप पुलिस पर लगा है।
अधिवक्ता सरफराज अंजुम मोर की ओर से दायर याचिका में कहा गया कि पुलिस ने तीन अगस्त को अरमान को बिना किसी कानूनी आधार के गिरफ्तार कर लिया और आठ अगस्त तक अवैध हिरासत में रखा। इस दौरान उसे शारीरिक व मानसिक यातनाएं दी गईं।
याचिका में यह भी आरोप है कि पुलिस ने स्थानीय संगठनों बजरंग दल और विश्व हिंदू परिषद के दबाव में काम किया और युवक को फर्जी केस में फंसाने की कोशिश की। वहीं गुमशुदा युवती ने स्वयं इलाका मजिस्ट्रेट, पलवल के समक्ष बयान देकर स्पष्ट किया कि अरमान निर्दोष है।
हाईकोर्ट ने माना कि आरोप बेहद गंभीर हैं और इससे नागरिकों के मौलिक अधिकारों का हनन होता है। अदालत ने इस मामले में 11 पुलिसकर्मियों समेत सभी जिम्मेदार अधिकारियों को पक्षकार बनाया है।