नूंह। भारी बारिश से खेतों में जलभराव के कारण मेवात में सरसों की बिजाई समय पर नहीं हो पा रही है। जिले में सरसों का रकबा घटने और उत्पादन में 20–25 प्रतिशत गिरावट की आशंका जताई जा रही है।
मेवात सरसों उत्पादन में प्रदेश में अव्वल माना जाता है और यहां की सरसों में तेल की मात्रा अधिक होती है। यह क्षेत्र की नकदी और प्रमुख फसल है, जिससे किसानों की आर्थिक स्थिति पर सीधा असर पड़ेगा।
लगातार बारिश ने खेतों को दलदल बना दिया है। सितंबर बिजाई का सही समय है, लेकिन देर से बोवाई होने पर पैदावार घटने की संभावना है।वहीं, नालों की सफाई और पंपिंग सेट लगाए गए हैं। जलनिकासी की कोशिशें की जा रही हैं, लेकिन किसानों के अनुसार यह नाकाफी है। खेतों में अभी भी एक से दो फीट तक पानी भरा हुआ है। किसान संगठनों ने बड़े पैमाने पर निकासी अभियान चलाने की मांग की है।
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किसानों की चिंता
हर साल सितंबर से बिजाई शुरू हो जाती है, लेकिन इस बार खेतों में पानी ही पानी है। -इलियास
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सरसों हमारी नकदी फसल है। रकबा घटने का मतलब है आमदनी में सीधी कमी। -भगत सिंह
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प्रशासन ने पंप लगाकर पानी की निकासी शुरू की है लेकिन असर बहुत धीमा है। -सद्दीक अहमद
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पिछले वर्ष की तुलना में इस साल सरसों का रकबा
पिछला वर्ष (2024–25): मेवात में लगभग 30 हजार हेक्टेयर में सरसों की बिजाई हुई थी।
इस साल (2025–26) अनुमानित 22 हजार से हेक्टेयर ही बिजाई होने की आशंका जताई जा रही है। यानी रकबा घटने की आशंका है। रकबा घटने और देर से बिजाई होने से उत्पादन में 20–25 प्रतिशत गिरावट का अनुमान है।
इससे न केवल किसानों की आय प्रभावित होगी, बल्कि प्रदेश की तेल उत्पादन क्षमता पर भी असर पड़ेगा।
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विशेषज्ञों की राय
सरसों की बिजाई के लिए सितंबर–अक्तूबर का समय सबसे उपयुक्त होता है। यदि बिजाई देर से होती है तो फसल प्रभावित होती है और उपज घट जाती है। मेवात में पानी की निकासी जल्द नहीं हुई तो उत्पादन में बड़ी गिरावट तय है। -परमजीत सिंह, पूर्व कृषि उप निदेशक
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प्रशासन लगातार नालों की सफाई और पंपिंग सेट से निकासी कर रहा है। कुछ स्थानों पर दिक्कत जरूर है लेकिन प्राथमिकता के आधार पर पानी निकालने का काम चल रहा है। -अखिल पिलानी, उपायुक्त, नूंह