नूंह। जिला मुख्यालय नूंह इन दिनों तालाब जैसा दृश्य पेश कर रहा है। शहर का बड़ा हिस्सा जलभराव से प्रभावित है। सड़कें डूबी हैं, सरकारी दफ्तरों में कामकाज ठप है और कॉलोनियों में लोग महीनों से परेशानी झेल रहे हैं। नगरपरिषद और जिला प्रशासन की ओर से लगातार प्रयासों का दावा किया जा रहा है लेकिन हालात सुधरते नहीं दिख रहे।
शहर में जलभराव हर वर्ष की बड़ी समस्या है। इसकी जद में सरकारी दफ्तरों के साथ-साथ घनी आबादी वाला क्षेत्र भी आ जाता है। इस बार बारिश जल्दी और अधिक होने से हालात और बिगड़ गए। दिल्ली-अलवर रोड के पश्चिम में खेड़ला गांव, नल्हड़ मेडिकल कॉलेज मोड़, सिंचाई विभाग का रेस्ट हाउस, पुराना उपायुक्त कार्यालय, महिला थाना, डाकघर, कृषि विभाग कार्यालय, सीएचसी नूंह, वाईएमडी कॉलेज, शिव कॉलोनी, वार्ड-10, 11, 12, वार्ड-1, 2, हाउसिंग बोर्ड कॉलोनी और तावडू रोड तक आधा से अधिक शहर जलभराव से जूझ रहा है।
ट्यूब की नाव बनी सहारा
शिव कॉलोनी और विष्णु कॉलोनी में करीब पांच फीट तक पानी जमा है। यहां के पंकज शर्मा, रघुबीर बघेल, मदन, राजेंद्र, देवीसिंह, रणजीत, किशन ठेकेदार, बिल्लू आदि ने बताया कि एक माह से पानी भरा है। लोग ट्रैक्टर की ट्यूब में हवा भरकर उसका नाव की तरह इस्तेमाल कर रहे हैं। मच्छरों और कीटों ने लोगों का जीना मुश्किल कर दिया है। बच्चे स्कूल नहीं जा पा रहे और शाम होते ही लाइट के नीचे कीड़े लोगों को बीमार कर रहे हैं।
शिकायत का भी असर नहीं
स्थानीय लोगों का कहना है कि नगरपरिषद खानापूर्ति कर रही है। रघुबीर बघेल का कहना है कि प्रशासन ने संसाधनों की खुली छूट दी है, फिर भी केवल आठ घंटे पंपसेट चलाए जा रहे हैं, जबकि जरूरत 24 घंटे बिजली वाले पंपों की है। उपायुक्त के समाधान शिविर में शिकायत देने के बाद भी कोई असर नहीं हुआ। मौजूदा गति से काम चला तो समस्या और दो माह भी बनी रह सकती है।
जिले में जलभराव की समस्या के समाधान के लिए सरकार से 20 करोड़ रुपये की मांग की गई है। संबंधित विभागों को सख्त निर्देश दिए गए हैं कि जल्द समस्या का समाधान हो। फिर भी कहीं कोई लापरवाही मिलती है तो सख्त कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।
-अखिल पिलानी, उपायुक्त नूंह