राजमार्ग पर डिवाइडरों पर न तो पर्याप्त पौधरोपण, न ही अधिकांश स्थानों पर रिफ्लेक्टिव पेंट व कैट-आई लगी
संवाद न्यूज एजेंसी
नूंह। दिल्ली, गुरुग्राम, नूंह और अलवर को जोड़ने वाले नेशनल हाईवे-248ए पर सड़क सुरक्षा से जुड़े कई महत्वपूर्ण मानकों की अनदेखी होती दिखाई दे रही है। मेवात से गुजरने वाले इस राष्ट्रीय राजमार्ग पर डिवाइडरों पर न तो पर्याप्त पौधरोपण किया गया है और न ही अधिकांश स्थानों पर रिफ्लेक्टिव पेंट व कैट-आई लगी हैं। रात के समय सामने से आने वाले वाहनों की तेज हेडलाइट सीधे दूसरी लेन के चालकों की आंखों पर पड़ती है, जिससे दुर्घटनाओं का खतरा लगातार बना रहता है। हैरानी की बात यह है कि इस गंभीर समस्या की ओर न तो राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) का ध्यान है और न ही जिला प्रशासन और जनप्रतिनिधि इस मुद्दे को गंभीरता से उठा रहे हैं।
रात में सबसे अधिक परेशानी
वाहन चालकों का कहना है कि रात के समय हाई बीम पर चलने वाले वाहनों की रोशनी सीधे सामने से आने वाले चालक की आंखों पर पड़ती है। यदि डिवाइडर पर घने पौधे या झाड़ियां लगी हों तो यह रोशनी काफी हद तक रुक जाती है, लेकिन एनएच-248ए के अधिकांश हिस्से में डिवाइडर खाली पड़े हैं।
रिफ्लेक्टिव पेंट और कैट-आई का भी अभाव
हाईवे पर कई स्थानों पर डिवाइडरों पर काले-पीले या सफेद रिफ्लेक्टिव पेंट नहीं हैं। रात में डिवाइडर स्पष्ट दिखाई नहीं देते, जिससे वाहन चालक भ्रमित हो जाते हैं। कई जगह कैट-आई (रिफ्लेक्टिव स्टड) भी गायब हैं या खराब हो चुके हैं।
संकेतकों की भारी कमी
सड़क सुरक्षा के लिए आवश्यक चेतावनी बोर्ड, स्पीड लिमिट, यू-टर्न, मोड़, गांव, स्कूल, अस्पताल और ब्लैक स्पॉट संबंधी संकेतक भी कई स्थानों पर नहीं हैं। जहां लगे हैं, वहां भी कई संकेतक टूटे या धुंधले हो चुके हैं। बारिश के दौरान रोड मार्किंग और लेन लाइनें स्पष्ट नहीं दिखतीं। इससे वाहन चालकों को लेन पहचानने में कठिनाई होती है और दुर्घटनाओं की आशंका कई गुना बढ़ जाती है।
जनप्रतिनिधियों की चुप्पी भी सवालों के घेरे में
मेवात से गुजरने वाला यह हाईवे हजारों वाहनों की रोजाना आवाजाही का प्रमुख मार्ग है। इसके बावजूद सड़क सुरक्षा से जुड़े मुद्दों को लेकर जनप्रतिनिधियों की ओर से भी कोई विशेष पहल सामने नहीं आई है। खलील अहमद, जुबेर, रमेश और इलियास का कहना है कि सड़क चौड़ी बना देना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि उसकी सुरक्षा व्यवस्था भी उतनी ही जरूरी है।
क्षेत्र के वाहन चालकों और सामाजिक संगठनों ने मांग की है कि एनएचएआई तत्काल हाईवे का सुरक्षा ऑडिट कराए, डिवाइडरों पर पौधारोपण या एंटी-ग्लेयर स्क्रीन लगाए, रिफ्लेक्टिव पेंट और कैट-आई लगाए जाएं तथा जहां संकेतकों की कमी है वहां नए संकेतक स्थापित किए जाएं। उनका कहना है कि यदि समय रहते इन कमियों को दूर नहीं किया गया तो भविष्य में बड़े हादसों से इनकार नहीं किया जा सकता।
विशेषज्ञ क्या कहते हैं?
सड़क सुरक्षा विशेषज्ञों के अनुसार डिवाइडरों पर पौधरोपण केवल सौंदर्यीकरण के लिए नहीं होता, बल्कि यह सामने से आने वाले वाहनों की तेज रोशनी को रोकने, धूल कम करने और चालक का ध्यान केंद्रित रखने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। उचित संकेतक, रिफ्लेक्टिव मार्किंग और नियमित रखरखाव सड़क दुर्घटनाओं को कम करने के सबसे प्रभावी उपायों में शामिल हैं।
सड़क सुरक्षा समिति की बैठक में सड़क दुर्घटना पीड़ित सहायता योजना, अवैध कटों को बंद करने, अतिक्रमण हटाने, ब्लैक स्पॉट पर सुधार कार्य, सड़क मरम्मत, जलभराव की समस्या, गलत पार्किंग, सीसीटीवी कैमरों की स्थापना, स्ट्रीट लाइट, सुरक्षित स्कूल वाहन नीति, सड़क सुरक्षा के लिए आदेश दिए गए हैं। सभी उपमंडल अधिकारियों, राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण, लोक निर्माण विभाग, जिला नगर योजनाकार, यातायात पुलिस, आरटीए, एचएसआईआईडीसी तथा अन्य संबंधित विभागों को संयुक्त अभियान चलाकर सड़क सुरक्षा से जुड़े सभी लंबित कार्य शीघ्र पूर्ण करने के निर्देश दिए।
- अखिल पिलानी, डीसी, नूंह