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अब उपजाऊ होगी फसल: हाइड्रोपोनिक तकनीक से बागवानी करना सीखेंगे विद्यार्थी, बिना मिट्टी के उगेंगी सब्जियां

Mon, 11 Mar 2024 08:10 AM IST
अनुज कुमार आशीष सिंह, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

जलवायु परिवर्तन से फसल उत्पादन में आ रही चुनौतियों को ठीक किया जाएगा। हाइड्रोपोनिक प्रणाली से होने वाली खेती-बागवानी से इन चुनौतियों से निपटा जाएगा।
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hyperdrop agriculture - फोटो : amar ujala
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विस्तार
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विश्व में जलवायु परिवर्तन की वजह से फसल उत्पादन में तमाम तरह की चुनौतियां सामने आ रही हैं। यही नहीं, बढ़ते शहरीकरण से खेती का रकबा भी सिकुड़ रहा है। ऐसे में हाइड्रोपोनिक प्रणाली से होने वाली खेती-बागवानी इन चुनौतियों से निपटने मददगार साबित हो सकती है। 

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फसल उत्पादन की इस तकनीक से दिल्ली के सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले छात्रों को रूबरू कराया जाएगा। समग्र शिक्षा के तहत 100 स्कूलों में हाइड्रोपोनिक सिस्टम स्थापित किए जाएंगे। इसके लिए कार्यशाला आयोजित कर छात्रों को प्रशिक्षण दिया जाएगा। 

इसका उद्देश्य खुली जगहों की कमी को देखते हुए छात्रों को बिना मिट्टी के सब्जियों की खेती करने में सक्षम बनाना है। इसमें छात्रों को सब्जियों में पीएच स्तर और पोषक तत्वों का प्रबंधन करना भी सिखाया जाएगा। इसके अलावा पौधों को सटीक पोषक तत्व मिल सके इसकी भी उन्हें जानकारी दी जाएगी। 
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इसमें विशेष बात यह है कि हाइड्रोपोनिक खेती करते हुए पानी की रीसाइक्लिंग करना भी छात्र सिखेंगे। इसमें फसल उत्पादन में रासायनिक खरपतवार या कीट नियंत्रण उत्पादों के उपयोग के बिना खेती की तकनीकों को सीखने पर जोर दिया जाएगा। 

यही नहीं, आत्मनिर्भरता और उद्यमशीलता कौशल पैदा करना है। समग्र शिक्षा से जुड़े एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि हाइड्रोपोनिक प्रणाली स्थापित करने के लिए प्रारंभिक लागत अधिक है, लेकिन भविष्य में यह किसानों को बेहतर लाभ प्रदान कर सकती है। हाइड्रोपोनिक खेती के लिए उपयोगी विकल्प बन सकती है। 

खेती की आधुनिक तकनीक है हाइड्रोपोनिक 
हाइड्रोपोनिक खेती की एक आधुनिक तकनीक है। इसमें बिना मिट्टी के पौधे उगाए जाते हैं। इस पद्धति में मिट्टी के बजाय सिर्फ पानी या फिर बालू व कंकड़ों के बीच पौधों की खेती की जाती है। नियंत्रित परिस्थितियों में 15 से 30 डिग्री सेल्सियस तापमान पर लगभग 80 से 85 प्रतिशत आर्द्रता में हाइड्रोपोनिक खेती की जाती है। 

पौधों को पोषण उपलब्ध कराने के लिए जरूरी पोषक तत्व व खनिज पदार्थों से युक्त एक विशेष घोल का उपयोग किया जाता है। इस घोल में फास्फोरस, नाइट्रोजन, मैग्नीशियम, कैल्शियम, पोटाश, जिंक, सल्फर और आयरन जैसे तत्वों को खास अनुपात में मिलाया जाता है।

नोडल प्रभारी किए जाएंगे नियुक्त
सभी स्कूल के लिए जिलास्तर पर अलग-अलग ऑफलाइन कार्यशाला आयोजित की जाएंगी। इसके लिए नोडल प्रभारी तैनात किए जाएंगे। कार्यशाला में 9वीं व 10वीं के चयनित छात्रों की भागीदारी सुनिश्चित करनी होगी। वहीं, शिक्षकों को अपनी कक्षा के छात्रों के साथ कार्यशाला में भाग लेने के निर्देश दिए गए हैं। स्कूल प्रमुखों को अपने स्कूल में हाइड्रोपोनिक सेटअप की स्थापना के लिए उचित स्थान की पहचान करने के लिए कहा है। 

सेटअप के संबंध में एजेंसी द्वारा सभी समन्वय और प्रशिक्षण के लिए स्कूल प्रमुख को एक विज्ञान शिक्षक को नोडल व्यक्ति के रूप में नामित करना होगा। साथ ही, कार्यशाला के समापन 
के बाद छात्रों से प्राप्त फीडबैक और सुझाव संबंधित नोडल अधिकारियों को प्रदान करेंगे।

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