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Spine Surgery : अब सटीक होगी रीढ़ की हड्डी में सर्जरी, घायल नहीं होंगी धमनियां और स्पाइनल कॉर्ड

Tue, 26 Nov 2024 05:16 AM IST
दुष्यंत शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, दिल्ली

सार

पेडिकल स्क्रू लगाने के दौरान धमनियां-स्पाइनल कॉर्ड घायल नहीं होंगी। ऐसी समस्याओं को दूर करने के लिए एम्स के ट्रामा सेंटर में शवों पर विशेष ट्रेनिंग दी गई। ट्रेनिंग देने के दौरान आधुनिक उपकरणों का इस्तेमाल किया।
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विस्तार
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रीढ़ की हड्डी की सर्जरी के दौरान होने वाली छोटी से छोटी गलती भी जल्द पकड़ में आएगी। साथ ही पेडिकल स्क्रू लगाने के दौरान धमनियां-स्पाइनल कॉर्ड घायल नहीं होंगी। ऐसी समस्याओं को दूर करने के लिए एम्स के ट्रामा सेंटर में शवों पर विशेष ट्रेनिंग दी गई। ट्रेनिंग देने के दौरान आधुनिक उपकरणों का इस्तेमाल किया।

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विशेषज्ञों का कहना है कि स्पाइन की सर्जरी में सबसे जटिल कार्य पेडिकल स्क्रू लगाना होता है। यह रीढ़ की हड्डी की सर्जरी में इस्तेमाल होने वाला एक इम्प्लांट है। पेडिकल स्क्रू, रीढ़ की हड्डी के संरेखण को बनाए रखने, कशेरुकाओं को मजबूत करने और फ्रैक्चर को ठीक करने में मदद करता है। इसे लगाने के दौरान यदि गलती से भी यह इधर-उधर हो जाए तो स्पाइनल कॉर्ड या धमनियां घायल हो जाती हैं। इस दौरान स्पाइनल कॉर्ड घायल होने से संबंधित निचले अंग का संपर्क मस्तिष्क से टूट सकता है। साथ ही उक्त अंग में लकवा मार जाता है। वहीं धमनियां घायल होने से शरीर के उक्त अंग में खून का प्रवाह बाधित हो जाता है।

एम्स के ट्रामा सेंटर के प्रमुख प्राेफेसर डॉ. कामरान फारूखी ने बताया कि स्पाइन सर्जनों के लिए पहली बार स्पाइन रोबोटिक्स, नेविगेशन और 3डी इमेजिंग कैडवेरिक प्रशिक्षण का आयोजन किया गया। शवों पर की गई सर्जरी के दौरान स्पाइन की सटीक सर्जरी करने की तकनीक सर्जन को सिखाई गई। नेविगेशन की मदद से सर्जन एक शॉट में ही सटीक जगह पर इंप्लांट लगा सकेगा।
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ट्रेनिंग में सोसाइटी ने दिया साथ
ट्रामा सेंटर में स्पाइनल कॉर्ड सोसाइटी के साथ मिलकर ट्रामा सेंटर के विशेषज्ञाें ने शैक्षणिक कार्यक्रम सर्जन को ट्रेनिंग दी। इसमें इमेजिंग के साथ स्पाइन रोबोटिक्स और नेविगेशन पर व्यावहारिक को बताया गया। वहीं इंट्रा-ऑपरेटिव 3डी की मदद से शरीर में सटीक जगह की पहचान, इंप्लांट को सटीक जगह पर लगाना, इसे लगाने के दौरान घायल होने वाले अंग को बचाना, संक्रमण सहित दूसरे नुकसान को कम या पूरी तरह से खत्म करने की तकनीक बताई गई।

इस मामलों में करनी पड़ती है सर्जरी
दुर्घटना, ऑस्टियोआर्थराइटिस, स्लिप्ड डिस्क, रीढ़ की हड्डी में गांठ, रीढ़ की हड्डी में स्टेनोसिस, बाहों और पैरों में कमजोरी या सुन्नता, चलने या अपने हाथों का उपयोग करने में परेशानी, रीढ़ की हड्डी में संक्रमण या पीठ दर्द के साथ तेज बुखार, पीठ में एक टूटी हुई या अव्यवस्थित हड्डी, रीढ़ की हड्डी का ट्यूमर सहित अन्य मामले में सर्जरी की जरूरत पड़ जाती है। यह सर्जरी काफी जटिल मानी जाती है।

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