विश्व पुस्तक मेले में बच्चों को खेल-खेल में सिखाने के लिए तरह-तरह के शैक्षणिक खिलौने आए हैं। ग्रेटर नोएडा के उद्यमी नरेश कुमार गौतम ने बताया, सरकार की न्यू एजूकेशन पॉलिसी के तहत बच्चों के बस्ते का बोझ कम करके इन्हें खेल-खेल में सिखाने का विधान किया गया है।
बच्चे अब खेल-खेल में गणित- विज्ञान और घड़ी देखना सीखेंगे और रंगों की पहचान कर पाएंगे। पजल गेम्स के जरिये इनका दिमाग तेज होगा। फिर न ही ये मोबाइल के पीछे भागेंगे और फिर इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स के कारण बीमार पड़ेंगे।
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नई दिल्ली विश्व पुस्तक मेले में बच्चों को खेल-खेल में सिखाने के लिए तरह-तरह के शैक्षणिक खिलौने आए हैं। त्रिकोण, गोला और वर्ग की पहचान करने के लिए लकड़ी के खिलौने, ट्रिक पजल, फिशिंग रॉड के जरिये संख्या ज्ञान, अलग-अलग आकृतियों के इस्तेमाल से घर बनाने की कला सीखने के लिए लकड़ी से बने खिलौने हैं। बच्चे किसी टास्क को पूरा करने की कला भी खेल से सीखेंगे। घड़ी के टुकड़ों को जोड़कर इसका आकार बनाना और फिर घड़ी देखना सीखना, रेनवो कलर की पहचान करने के लिए 2000 से ज्यादा शैक्षणिक खिलौने एक जगह पर मौजूद हैं।
किताबों के कवर से लेकर अंदर के पन्नों तक को तरह-तरह के क्रिएटिव कॉन्सेप्ट में तैयार किया है। एनिमेशन के इस्तेमाल से परी कथाएं, बच्चों में फेमस कार्टून कैरेक्टर वाली स्टोरी, फल, फूल, जानवरों, पक्षियों की जानकारी को पन्नों पर बनाया गया है।
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5000 तरह के खिलौने
32 साल से शैक्षणिक गैजेट्स बनाने का काम कर रहे ग्रेटर नोएडा के उद्यमी नरेश कुमार गौतम ने बताया, सरकार की न्यू एजूकेशन पॉलिसी के तहत बच्चों के बस्ते का बोझ कम करके इन्हें खेल-खेल में सिखाने का विधान किया गया है। लोकल फॉर वोकल के तहत शैक्षणिक खिलौनों के निर्माण को बल मिला है। वे 5000 तरह के इस तरह के खिलौने बना रहे हैं। विदेशी मार्केट के साथ-साथ अब भारतीय बाजार में इनकी मांग बढ़ी है। इस बार नई दिल्ली विश्व पुस्तक मेले में इसे धार मिल रही।