किशोर न्याय बोर्ड के साथ शारदा विवि के न्याय विभाग ने बालिग होने पर दिलाई नौकरी
माई सिटी रिपोर्टर
ग्रेटर नोएडा। हत्या के एक मामले में 16 माह तक जुवेनाइल होम में रहने वाले युवक ने काउंसलिंग के बाद जीवन की राह चुन ली है। व्यवहार में सुधार होने और बालिग होने के बाद जुवेनाइल होम से बाहर आए युवक को किशोर न्याय बोर्ड और शारदा विश्वविद्यालय के लॉ विभाग ने मेरठ की एक ऑटोमोबाइल कंपनी में जॉब दिलाई है। इस नौकरी के सहारे युवक अब अपने छोटे भाई को पढ़ाएगा।
विश्वविद्यालय के स्कूल ऑफ लॉ ने जिला प्रोबेशन ऑफिसर के साथ एमओयू किया है। इस अनुबंध में विभाग के प्रोफेसर और विद्यार्थी फेज-2 नोएडा स्थित जुवेनाइल होम में रहने वाले किशोरों की काउंसलिंग करेंगे। डीन स्कूल ऑफ लॉ की प्रोफेसर कोमल विज और विवि से पीएचडी कर रहे विद्यार्थी और अधिवक्ता अनुराग त्यागी ने बताया कि टीम ने जुवेनाइल होम में किशोरों को परामर्श दिया है। गौतमबुद्धनगर के निवासी एक किशोर पर उसके परिवार के साथ मिलकर एक व्यक्ति की हत्या का मुकदमा चला था। उसके घर और परिवार पर कुछ लोगों ने हमला किया था, इसमें दोनों पक्षों में मारपीट होने पर दूसरे पक्ष के एक व्यक्ति की जान चली गई थी। घटना के दौरान वह 11वीं कक्षा का विद्यार्थी था। बालिग होने तक किशोर करीब 16 माह तक जुवेनाइल होम में रहा। जुवेनाइल होम में उसका छोटा भाई भी है। इस दौरान लगातार उसके नए जीवन और करियर के लिए काउंसलिंग की गई।
अब बालिग होने पर उसे जुवेनाइल होम से रिहा कर दिया गया है। किशोर न्याय बोर्ड फेज-2 और विश्वविद्यालय के लॉ विभाग की पहल पर उसे मेरठ की ऑटोमोबाइल कंपनी में नौकरी मिल गई है। उसका कहना है कि कुछ समय में उसका छोटा भाई जब जुवेनाइल होम से बाहर आएगा तो उसे वह पढ़ाएगा।