केंद्रीय शिक्षा राज्यमंत्री राजकुमार रंजन ने किया उद्घाटन
पहले दिन आजादी के अनसंग हीरोज पर लिखी 75 युवा लेखकों की किताबों का विमोचन
50 साल पूरे होने पर डाक टिकट जारी
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली।
प्रगति मैदान के नए हॉल में शनिवार को विश्व पुस्तक मेले का आगाज हुआ। केंद्रीय शिक्षा राज्यमंत्री राजकुमार रंजन ने मेले का उद्घाटन किया। इस दौरान केंद्रीय मंत्री ने आजादी के अनसंग हीरोज पर लिखी 75 युवा लेखकों की किताबों का विमोचन किया। साथ ही दिल्ली विश्व पुस्तक मेले के 50 साल पूरे होने पर एनबीटी पर एक डाक टिकट भी जारी किया। राष्ट्रीय पुस्तक न्यास के निदेशक युवराज मलिक, नोबल पुरस्कार विजेता ऐनी एर्नोक्स, फ्रांस के राजदूत इमैनुअल लेनिन, फ्रांस दूतावास में सांस्कृतिक मामलों के सलाहकार इमैनुएल लेब्रल डेमियंस और आईटीपीओ के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक प्रदीप सिंह खरौला मौजूद रहे।
केंद्रीय शिक्षा मंत्री ने कहा कि कोरोना महामारी के बाद फिर से प्रगति मैदान के नए हॉल में सैकड़ों प्रकाशकों और अनगिनत पाठकों को एक साथ उपस्थित होने का मौका मिला है। यह उनका सौभाग्य है कि मेहमान देश फ्रांस, बाकी विदेशी मेहमानों और देश के प्रकाशकों, पाठकों का स्वागत करने का मौका मिला। केंद्रीय शिक्षा मंत्री ने पाठकों को राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के पवेलियन में आमंत्रित किया। यहां अभिभावकों को उनके बच्चों के भविष्य से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी मिलेंगी। उन्होंने मेले की सफलता की कामना करते हुए एनबीटी को शुभकामना दी है। इस बार का पुस्तक मेला युवाओं और आजादी के अनसंग हीरोज पर केंद्रित है। इसके अलावा मेले के थीम पवेलियन में जी-20 और आजादी के अमृत महोत्सव की झलक नजर आती है। हथकड़ी में जकड़े भगत सिंह और कारावास में लिखे उनके मूल खत यहां मौजूद हैं।
अगले साल पूरा प्रगति मैदान तैयार मिलेगा
आईटीपीओ के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक प्रदीप सिंह खरौला नेे कहा कि अगले साल नई दिल्ली विश्व पुस्तक मेला आयोजित होने से पहले प्रगति मैदान पूरी तरह बनकर तैयार हो जाएगा। इसके पुनर्निर्माण का काम आखिरी पड़ाव पर है। प्रदीप सिंह ने कहा कि किताबें मनुष्य को सशक्त बनाती हैं, इसलिए किताबें जरूरी हैं। उन्होंने पुस्तक मेले में शामिल सभी सहभागियों का स्वागत किया।
22 भाषाओं की 75 किताबों का विमोचन
एनबीटी ने 30 साल से कम उम्र के उभरते लेखकों के बीच प्रधानमंत्री युवा योजना के तहत अखिल भारतीय लेखन प्रतियोगिता का आयोजन कराया। पुस्तक मेले की थीम आजादी का अमृत महोत्सव के तहत युवाओं को इंडिया एट 75 टास्क दिया गया था। प्रतियोगिता में सफल 75 लेखकों की किताबों का विमोचन किया गया। युवा स्कीम के तहत 25 युवा लेखकों ने भी आजादी के अनसंग हीरोज पर किताबें लिखी हैं।
इंडिया एट 75 - उभरते लेखकों की विचारधारा
किताब - आजादी में दलित समाज का योगदान
पहली बार मैथिली भाषा में बिहार के दलित हीरोज पर किताब लिखी है, इसमें किरोई सुसहर, मंगल लोहार जैसे 30 लोगों की गाथा लिखी है
- कृष्णेंदु मोहन ठाकुर, बिहार
किताब - सागर के सेेनानी
इसमें उन चार भारतीय व्यवसायियों द्वारकानाथ टैगोर, जमशेद जी टाटा, वीओ चिदंबरम पिल्लई, वालचंद हीराचंद की कहानी है, जिन्होंने सबसे पहले भारतीय नेविगेशन कंपनी खड़ी की
- सुशांत भाटी, गोरखपुर (यूपी)
किताब - प्रताप जंग - द अल्टीमेट सेक्रीफाइज
1857 में अवध की बेगम हजरत महल ने अंग्रेजों के विरुद्ध जंग छेडी, तब लाल प्रताप नामक एक तालुकदार ने अपनी फौज प्रताप जंग के साथ आखिरी सांत तक उनका साथ दिया, यह उन्हीं की कहानी है
- सौहार्द डे, पश्चिम बंगाल
गांधी बुड़ी - शैडो
- यह हिस्टोरिकल फिक्शन है, मातंगिनी हजरा बंगाल की अनसंग हीरो हैं, जिन्हें प्यार से गाधी बूड़ी (गांधीवादी बूढ़ी महिला) कहा जाता था
- प्राप्ति शर्मा, दिल्ली