नोएडा। राष्ट्रीय उपभोक्ता विवाद निस्तारण आयोग (एनसीडीआरसी) ने बुधवार को नोएडा के वेव मेगा सिटी सेंटर प्राइवेट लिमिटेड प्रोजेक्ट के 34 फ्लैट खरीदारों को राहत देते हुए बिल्डर को पैसे वापस करने का आदेश दिया है। खरीदारों की एसोसिएशन चार वर्ष से एनसीडीआरसी में बिल्डर के खिलाफ लड़ाई लड़ रही थी। अब वेव ग्रुप को करीब 50 करोड़ रुपये लौटाने होंगे।
जुलाई 2018 में प्रोजेक्ट अमोर और ट्रूशिया के 19-19 खरीदारों ने फ्लैट के कब्जे में देरी को लेकर एनसीडीआरसी में गुहार लगाई थी। पहली सुनवाई अक्तूबर 2018 में हुई। फ्लैट खरीदारों ने बताया कि फैसले में शामिल 38 फ्लैट खरीदारों में से 2 खरीदार प्रोजेक्ट से पहले ही निकल चुके हैं, जबकि दो खरीदारों ने बिल्डर से समझौता कर लिया। अब 34 खरीदारों को इसका लाभ मिलेगा। एनसीडीआरसी के आदेशों के मुताबिक मूल धन के अलावा 9 प्रतिशत ब्याज के साथ आठ हफ्ते में पैसा देना होगा। अगर आठ हफ्ते में बिल्डर पैसा नहीं देगा तो ब्याज की राशि 12 प्रतिशत के आधार पर वहन करनी होगी। प्रत्येक फ्लैट खरीदार को कोर्ट आदि में फीस भरने में हुए खर्च की भरपाई के तौर पर बिल्डर की ओर से 50 हजार रुपये की अतिरिक्त राशि भी मिलेगी। वहीं, वेव ग्रुप के प्रवक्ता का कहना है कि हम इस मुद्दे पर टिप्पणी नहीं कर पाएंगे, क्योंकि अभी तक आदेश की कॉपी नहीं मिली है।
वेव ग्रुप 16 करोड़ जमा करे तो खरीदारों को मिलेगा हक
वेव ग्रुप की परियोजना पर प्राधिकरण का 90 करोड़ रुपये का बकाया हैं, लेकिन अब पुनर्निर्धारण के बाद 83 करोड़ रुपये चुकाने होंगे। अब प्राधिकरण में वेव ग्रुप किस्त की राशि के तौर पर 16 करोड़ रुपये की राशि जमा करेगा तो परियोजना में निर्माण के अलावा रजिस्ट्री की प्रक्रिया शुरू हो सकती है। परियोजना में फ्लैट के अलावा वाणिज्यिक संपत्तियां हैं। इसमें शोरूम आदि शामिल हैं। यह अमोर परियोजना का भाग है। इसमें करीब 700 फ्लैट के अलावा 500 व्यावसायिक प्रॉपर्टी की बिक्री होने की बात बताई गई। इसमें से करीब 40-50 खरीदारों की रजिस्ट्री फंसी हुई है। अगर वेव ग्रुप की ओर से इसमें सहयोग किया जाता है तो खरीदारों को फायदा होगा। ब्यूरो