अमर उजाला ब्यूरो
गुरुग्राम। गांव रिठौज में मतदान से एक दिन पहले ही सर्वसम्मति से सरपंच को चुन लिया गया। ऐसे में गांव में बने बूथ पर मतदान की सिर्फ औपचारिकता ही पूरी की गई। दिन भर इस गांव के बूथ पर पोलिंग पार्टियां खाली बैठी रहीं। रिठौज गांव का इतिहास रहा है कि यहां विगत 45 साल से कभी सरपंच पद के लिए मतदान नहीं किया गया। इस गांव के लोगों ने हमेशा ही अपने सरपंच का चुनाव सर्वसम्मति से किया है। इस बार गांव में ऐसा नहीं था। यहां सरपंच पद के लिए 17 उम्मीदवारों ने पर्चे भरे थे। माना जा रहा था कि इस बार गांव का दशकों पुराना इतिहास बदल जाएगा, मगर ऐसा हुआ नहीं। गांव के लोगों ने एक रात पहले ही पंचायत बुलाकर सर्वसम्मति से सरपंच चुने जाने पर बल दिया। गांव में पंचायत बैठी और करीब चार घंटे तक चली पंचायत के बाद नामांकन करने वाले कैप्टन रामबीर को सर्वसम्मति से सरपंच चुन लिया गया।
इस सर्वसम्मति चुनाव का श्रेय बाबा भूमिया को दिया गया। गुर्जर बाहुल्य गांव रिठौज में वर्ष 1977 के बाद से सरपंच पद के लिए मतदान नहीं हुआ है। तीन दादाओं के इस गांव में हर बार अलग-अलग दादाओं के परिवार से सरपंच सर्वसम्मति से चुन लिया जाता था। रिठौज गांव में दादा गुर्जर, दादा सैय्या व दादा भूरा का परिवार रहता है। इस बार दादा गुर्जर के परिवार से सरपंच चुना जाना था। लेकिन पूरे गांव से 17 प्रत्याशी मैदान में थे, जिनमें से 13 प्रत्याशी सबसे कम मतदाता वाले दादा गुर्जर परिवार से थे। चार प्रत्याशी दादा सैय्या व दादा भूरा परिवार से थे।
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ऐसे किया चुनाव: पंचायत में गतिरोध को खत्म करने के लिए पहले सभी प्रत्याशियों से नाम वापसी के लिए शपथ पत्र ले लिया गया। इसके बाद सरपंच पद पर पंचायत में मंथन शुरू हुआ। करीब चार घंटे मंथन के बाद कैप्टन रामबीर के नाम पर पंचायत ने मुहर लगा दी।