इकरा ने खुद की बोर्ड की तैयारी
हाईस्कूल में इकरा के 500 में से 577 नंबर आए हैं। इकरा ने बताया कि शुरुआत में खुद के नोट्स बनाए और रिविजन पर पूरा ध्यान दिया। क्योंकि पढ़ाई के साथ रिविजन भी जरूरी होता है। इकरा की कामयाबी से परिवार के लोग बहुत खुश हैं। रिश्तेदार छात्रों के घर पहुंचकर बधाई दे रहे हैं।
कोविड के दौरान ही सोच लिया था डॉक्टर बनना है
शाहबेरी में रहने वाली इकरा ने बताया कि कोविड के दौरान डॉक्टरों की बहुत कमी महसूस हो रही थी। उसी दौरान मैंने डॉक्टर बनने की ठान ली। तब से मन लगाकर पढ़ाई कर रही हूं। 10वीं में आते ही शुरूआत में खुद से पढ़ाई की। उसके बाद नवंबर और दिसंबर में ट्यूशन लगाया।
परिवार ने दिया पूरा समर्थन
हालांकि, दो महीने के अंदर ट्यूशन छोड़ दिया। ताकि घर वालों पर बोझ न बढ़े। उस दौरान सुबह चार बजे उठकर पढ़ाई करती थी। यूट्यूब से भी पढ़ाई में मदद ली। पढ़ाई के दौरान बीच-बीच में गेम्स और दोस्तों के साथ खेलती भी थी, ताकि माइंड फ्रेश रहे। इकरा ने आगे बताया कि पढ़ाई के दौरान कभी भी कोई परेशानी हुई तो परिवार ने पूरा साथ दिया और हमेशा हौसला बढ़ाया। इकरा के पिता मुस्तकीम सैफी फैब्रीकेटिंग का कार्य करते हैं और मां शहनाज हाउस वाइफ है।