सीएंडडी वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट की क्षमता हर दिन 850 मीट्रिक टन मलबा निस्तारित करने की है, लेकिन फिलहाल इसे 300 मीट्रिक टन क्षमता से चलाया जा रहा है। ट्विन टावर का मलबा बढ़ने पर इसकी निस्तारण क्षमता को बढ़ाने के निर्देश रैमकी कंपनी को दिए गए हैं, क्योंकि रोजाना 250 मीट्रिक टन मलबा ध्वस्त इमारतों का भेजा जाएगा जबकि शहर के अन्य हिस्सों से आने वाला मलबा अलग होगा।
नोएडा में जमींदोज ट्विन टावरों के भारी-भरकम 80 हजार मीट्रिक टन मलबे को ठिकाने लगाने का काम मंगलवार से शुरू हो गया। ध्वस्त इमारतों के बड़े-बड़े टुकड़ों को बुलडोजर और ड्रिल मशीनों के जरिये तोड़कर कंक्रीट में तब्दील किया जा रहा है। हर दिन 250 मीट्रिक टन मलबा सेक्टर-80 के कंस्ट्रक्शन एंड डिमोलिशन (सीएंडडी) वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट भेजा जाएगा। कंक्रीट तोड़ने वाली ड्रिल मशीनों का शोर दिनभर सुनाई दिया। प्रदूषण से निपटने के लिए पानी की बौछारों के बीच काम किया जा रहा है।
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सीएंडडी वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट की क्षमता हर दिन 850 मीट्रिक टन मलबा निस्तारित करने की है, लेकिन फिलहाल इसे 300 मीट्रिक टन क्षमता से चलाया जा रहा है। ट्विन टावर का मलबा बढ़ने पर इसकी निस्तारण क्षमता को बढ़ाने के निर्देश रैमकी कंपनी को दिए गए हैं, क्योंकि रोजाना 250 मीट्रिक टन मलबा ध्वस्त इमारतों का भेजा जाएगा जबकि शहर के अन्य हिस्सों से आने वाला मलबा अलग होगा। अगले दो से तीन दिनों में ट्विन टावर के मलबे का प्लांट में निस्तारण होने लगेगा। अनुबंध के तहत ट्विन टावर का मलबा सीएंडडी वेस्ट मैनेजमेंट तक पहुंचाने की जिम्मेदारी एडिफिस इंजीनियरिंग कंपनी की होगी।
प्लांट में जो भी मलबा निस्तारित होगा उसका प्रति क्यूब मीटर के हिसाब से कंपनी को खर्च उठाना होगा। मलबा हटाने के लिए रोजाना 20 डंपर लगाए जाएंगे। एनजीटी के नियमों के पालन करते हुए इस मलबे को ग्रीन शीट और उस पर पानी डालकर ले जाया जाएगा, ताकि धूल नहीं उड़े। दो शिफ्ट में मलबा प्लांट पहुंचाया जाएगा। मलबे को सरिया व अन्य धातुओं को अलग करने का काम दोपहर में किया जाएगा, ताकि निवासियों को परेशानी न हो। मलबे से सड़क व फुटपाथ पर बिछने वाली इंटरलॉकिंग टाइल्स, कर्व स्टोन व सीसी ब्लॉक बनाए जाएंगे।
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मलबा हटने पर बनेगा हरित क्षेत्र
ग्रीन एरिया की जमीन को घेरकर ट्विन टावर बनाया गया था। टावर ध्वस्त हो गए हैं और मलबा हटाने की जद्दोजहद जारी है। इसके हटने के बाद उस जगह को ग्रीन एरिया के रूप में ही विकसित किया जाएगा। स्थानीय निवासियों के लिए इसको पार्क के रूप में भी विकसित किया जा सकता है।