ट्विन टावर को जमींदोज करने के लिए ब्लास्ट बटन की जिम्मेदारी मिलना सपने के सच होने जैसा है। पिछले साल सुप्रीम कोर्ट ने दोनों टावर को ध्वस्त करने का आदेश दिया था, तब मैंने भगवान से प्रार्थना की थी कि ब्लास्ट बटन को दबाने की जिम्मेदारी मुझे मिल जाए। इसके बाद जब टावर ध्वस्त करने वाली कंपनी एडिफिस की तरफ से इसके लिए संपर्क किया गया तो खुशी का ठिकाना नहीं रहा।’ अब 28 अगस्त को यह सपना सच हो जाएगा। यह बातें ब्लास्टर चेतन दत्ता ने कहीं।
हिसार निवासी चेतन दत्ता (49) विस्फोटक व्यवसाय से जुड़े हुए हैं और ताप विद्युत संयंत्रों, खान और अन्य संरचनाओं के विध्वंस का संचालन किया है। यह पहला आवासीय भवन है जिसके लिए चेतन ब्लास्टर का काम कर रहे हैं। चेतन ने बताया कि उन्हें विश्वास है कि विध्वंस सफल और सुरक्षित तरीके से किया जाएगा। हमने ऑपरेशन को अंजाम देने के लिए काफी तैयारी की है। सभी छोटे पहलुओं व समस्याओं को ध्यान में रखा गया है।
ट्विन टावर में विस्फोट करने के लिए 3,700 किलोग्राम से अधिक विस्फोटकों का इस्तेमाल किया जा रहा है। हम लोेगों का सबसे अधिक ध्यान इस बात को लेकर है कि आसपास के इमारतों को किसी तरह से नुकसान न पहुंचे। हम लोगों ने इसके लिए बहुत शोध किया है। विस्फोटक लगाने के बाद ट्विन टावरों की तीन बार जांच की गई। मलबे का उड़ना एक प्रमुख चिंता का विषय है और इसे रोकने के लिए विस्फोट क्षेत्र को लोहे की जाली की चार परतों और कपड़े की दो परतों से ढका गया है। विध्वंस के दौरान कोई मलबा नहीं उड़ेगा, लेकिन धूल उड़ सकती है।
50 से 70 मीटर की दूरी से दबाया जाएगा बटन
चेतन का कहना है कि हम ट्विन टावर से लगभग 50-70 मीटर दूर होंगे। वहीं से बटन दबाया जाएगा। इसमें कोई खतरा नहीं होगा और पूरा यकीन है कि टावर सही तरीके से ढह जाएंगे। यह एक सरल प्रक्रिया है। हम डायनेमो से करंट उत्पन्न करते हैं और फिर बटन दबाते हैं, जो 9 सेकंड के भीतर सभी शॉक ट्यूबों में डेटोनेटर को प्रज्वलित कर देगा और बिल्डिंग जमींदोज हो जाएगी। लगभग 100 मीटर ऊंची इमारत को गिराने में लगे भारतीय और विदेशी ब्लास्टर की एक टीम को छोड़कर टावर के चारों ओर 500 मीटर के दायरे में किसी के भी आने की अनुमति नहीं होगी।