नोएडा। ट्विन टावर ध्वस्तीकरण के बाद बुधवार से नुकसान की जांच के लिए संरचनात्मक ऑडिट शुरू हो गया। विस्फोट से 50 मीटर के दायरे में स्थित एमराल्ड कोर्ट और एटीएस विलेज को काफी नुकसान हुआ है। एटीएस के पिलर और दीवारों में बड़ी दरारें आईं हैं, जबकि एमराल्ड कोर्ट में सात पिलर में दरारें आई हैं।
एमराल्ड कोर्ट के तीन और एटीएस विलेज के छह टावरों की जांच की जा रही है। एमराल्ड कोर्ट के बेसमेंट में जिन पिलरों की मरम्मत की गई थी। उनमें दरारें नहीं आई हैं, लेकिन दूसरे पिलरों को नुकसान पहुंचा है। एटीएस के फ्लैटों में किसी के बीम तो किसी के पिलर में दरारें हैं। ट्विन टावर का मलबा गिरने से खिड़कियों के कांच आदि भी टूटे हैं। दरारों की जांच के लिए नॉन डिस्ट्रक्टिव टेस्ट कराया जा रहा है। इसमें मशीनों के अलावा डिटेक्टर होता है। यह एक प्रकार से एक्सरे की तरह होता है, जो नुकसान का आकलन करता है।
पुरानी कमेटी ही करेगी काम
आसपास के टावरों का संचरनात्मक ऑडिट करने वाली कमेटी ही ध्वस्तीकरण के बाद की जांच कर रही है। इसमें डीएंडआर कंसलटेंट और स्ट्रक्चर डिजाइन स्टूडियो फरीदाबाद का ज्वाइंट वेंचर काम कर रहा है। इसे सुपरटेक ने नियुक्त किया है। 15-20 दिन में इसकी रिपोर्ट मिल जाएगी। हालांकि , एजेंसी का कहना है कि कोई बड़ा खतरा नहीं है। इस नुकसान का आकलन पहले से किया गया था। इसमें कई विशेषज्ञ लगे हुए हैं। दो-तीन दिन में विजुअल टेस्टिंग हो जाएगी। इसके बाद फिर से टेस्टिंग आदि की प्रक्रिया शुरू होगी।
पिलरों की मरम्मत में लापरवाही करा सकती थी नुकसान
ध्वस्तीकरण से पहले एमराल्ड कोर्ट के आरडब्ल्यूए ने 55 पिलरों की मरम्मत कराई थी। आरडब्ल्यूए के मुताबिक यह पिलर कमजोर हो चुके थे और ध्वस्तीकरण के प्रभाव को सह नहीं सकते थे। ध्वस्तीकरण के बाद एमराल्ड कोर्ट के कुछ और पिलर जर्जर हो चुके हैं। ऐसे में बताया जा रहा है कि अगर कमजोर पिलरों की मरम्मत नहीं कराई जाती तो बड़ा नुकसान हो सकता था।