-युवा सुनने पहुंचे रहे हैं भूतिया कहानी, सैर का भी उठा रहे लुत्फ
-हाल ही में स्मारक में शुरू किया है हॉन्टेड हाउस वॉक
आशीष सिंह
नई दिल्ली। अगर आपको भूत प्रेत की कहानियां सुनने में दिलचस्पी है। डरावने रास्ते पसंद हैं तो वीकेंड पर आपका फिरोजशाह कोटला स्मारक जाना फायदेमंद हो सकता है। स्मारक की हर शनिवार और रविवार की हॉन्टेड वॉक में आपको अलग तरह का अनुभव होगा। खूनी दरवाजे से स्मारक के अंदर के अशोक स्तंभ के करीब तीन किमी के रास्ते में आपकी चाहतें पूरी हो जाएंगी। दिलचस्प यह कि दो सप्ताह पहले शुरू हुई इस वॉक को दिल्लीवाले पसंद भी कर रहे हैं। अधिकारियोें की मानें तो अभी तक 200 लोगों ने इस डरावने रास्ते का लुत्फ उठाया है।
स्मारक में पथरीले मार्ग से गुजरकर रास्ता तय करना पड़ता है। सड़क के बीच स्थित खूनी दरवाजे के पास पेड़ व झाड़ियां हैं। इसी रास्ते से होकर कंटीली झाड़ियों के बीच में यह स्मारक है। पर्यटकों को दूर से ही यह स्मारक भूतिया होने की अनुभव कराता है। इसके अंदर जाते ही इसमें पसरा अंधेरा डराने वाला होता है। कहा जाता है कि रात में यहां चीखने और रोने की आवाजें आती हैं। फिरोज शाह स्मारक में एक बावली, अशोक के समय का भव्य स्तंभ और इमारत के चबूतरे के नीचे गुप्त कमरों सहित कई चीजें हैं। स्थानीय लोग व गाइड तरह-तरह की कहानियां सुनाते हैं। कहा जाता है कि अदृश्य आत्माएं जिन्न को खुश करने के लिए इकट्ठा होती हैं। इस वजह से लोग यहां जाने से डरते हैं। यह हवेली भूतिया हवेली के नाम से जानी जाती है।
शिकारगाह के लिए बनवाया था स्मारक
सुल्तान फिरोज शाह तुगलक ने सन 1354 में इस स्मारक को अपने शिकारगाह के लिए बनवाया था। फिरोज शाह के समकालीन इतिहासकार शम्स सिराज अफीफ ने लिखा है कि नगर की इमारतें उत्तरी रिज पर फिरोज शाह द्वारा बनवाए गए महल व शिकारगाह (जो वर्तमान में पीर गायब के नाम से जानी जाती है) तक फैली है। इसमें लाल कोट पत्थर का इस्तेमाल किया गया है। दिल्ली टूरिज्म टूरिज्म ट्रांसपोर्टेशन डेवलपमेंट कॉरपोरेशन ने यहां हुई घटनाओं के चलते इसे हॉन्टेड हाउस माना है। हालांकि, स्मारक में लोगों ने जगह-जगह दिए व अगरबत्ती जलाए हुए नजर आते हैं। यह जगह सुनसान है। लोगों का मनाना है कि यहां से शाम के समय डरावनी आवाजें सुनाई आती हैं।
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इतिहास से रूबरू कर रहा स्मारक
इसकी कहानियों को लोगों तक पहुंचाने के लिए और इतिहास से रूबरू कराने के लिए डीटीटीडीसी हॉन्टेड वॉक लेकर आया है। डीटीटीडीसी के अधिकारियों ने बताया कि पहले इसके बारे में लोगों के बीच जानकारी का अभाव था, लेकिन अब लोग देश ही नहीं विदेश से भी पर्यटक भी पहुंच रहे हैं। बीते माह से अब तक 200 से अधिक पर्यटक यहां की सैर करने आ चुके हैं। पर्यटकों के बीच यह जगह तेजी से मशहूर हो रही है। बाहर कोई बोर्ड भी नहीं है, जिससे बोर्ड भी जल्द लगाया जाएगा। वॉक के लिए डीटीटीडीसी की वेबसाइट से बुकिंग की जा सकती है।
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वर्जन
मैं पहले भी यहां आया हूं, लेकिन इसकी कहानी पहली बार जब पता चली तो इसे फिर से देखने आया हूं। यहां पहुंचकर अच्छा लग रहा है। यहां आकर नया अनुभव मिला।
-उदित, पर्यटक, गाजियाबाद
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मुझे हॉन्टेड जगहों पर घूमना पसंद है। मैं अपनी दोस्तों के साथ यहां आई हूं। यहां काफी कुछ देखने को मिल रहा है। सुनसान होने से डरावनी जगह है।
-प्रिया, पर्यटक, गुरुग्राम