जिला अस्पताल की तीन लिफ्ट छह जून से बंद हैं। इनमें लापरवाही का पानी भर गया है। इस वजह से इन्हें बंद किया गया है। ये लिफ्ट मरीजों के लिए हैं। इनसे मरीज और तीमारदार तीसरी, चौथी और पांचवीं मंजिल पर जाते हैं। अब मरीजों को सीढ़ियों से हांफते हुए वॉर्डों में जाना पड़ रहा है।
वैसे तो अस्पताल में नौ लिफ्ट हैं, लेकिन दो कुछ फ्लोर पर खुलती ही नहीं हैं, क्योंकि लॉक लगा हुआ है। एक का इस्तेमाल अधिकारी, डॉक्टर और स्टाफ करते हैं। उसका इस्तेमाल मरीजों को नहीं करने दिया जाता है। छह लिफ्ट मरीजों के लिए हैं, जिनमें से तीन पानी भरने से बंद हैं। तीनों लिफ्ट वॉर्डों से थोड़ी दूर हैं। इनमें भीड़ अधिक होने से कारण गंभीर मरीजों की तो बारी ही नहीं आती, क्योंकि यहां न कोई ऑपरेटर तैनात है और न ही गार्ड, जो मरीजों को पहले लिफ्ट में चढ़ने दे। ऐसे में मरीज सीढ़ियों के जरिये वॉर्ड में पहुंच रहे हैं।
...सीढ़ियों का सहारा
बुधवार को भी मरीजों और तीमारदारों को चौथी-पांचवीं मंजिल तक सीढ़ियों से हांफते हुए पहुंचना पड़ा। भर्ती होने वाले कई मरीजों को तीमारदार सीढ़ियों से वॉर्ड तक लेकर गए। मरीज सीढ़ियों पर बैठ-बैठकर वॉर्ड तक पहुंचे। आरोप है कि उन्होंने स्टाफ लिफ्ट में चढ़ने की कोशिश की, लेकिन उन्हें निकाल दिया गया।
टोटियां चोरी होने से भरा पानी
आठवीं मंजिल पर सीएमओ कार्यालय के बाथरूम से 6 जून को टोटियां चुरा हो गई थीं। इसकी वजह से तीनों लिफ्टों में पानी भर गया। अस्पताल प्रशासन को लिफ्टें बंद करनी पड़ीं। सीएमओ कार्यालय आमतौर पर शाम को बंद हो जाता है, लेकिन स्टाफ ने ताला नहीं लगाया था, इसलिए टोटियां चोरी हो गईं। इससे पहले भी सीएमओ कार्यालय में चोरी हुई थी। उस समय स्टाफ ने सीढ़ियों पर ताला लगा दिया था।
बाहर से खरीदना पड़ रहा पानी
उधर पानी की पाइपलाइन में खराबी आने की वजह से अस्पताल में पानी की सप्लाई भी बंद है। जल विभाग चार से पांच घंटे में टैंकर के जरिये पानी भेज रहा है। लोगों को बाहर से पानी लाकर अपनी जरूरतें पूरी करनी पड़ रही हैं। अस्पताल प्रशासन का कहना है कि 13 जून तक सप्लाई ठीक हो पाएगी।
क्या कहते हैं अधिकारी
सीएमएस डॉ. रेनू अग्रवाल ने बताया कि आठवीं मंजिल पर बाथरूम से टोटियां चोरी होने के कारण फ्लोर पर पानी भर गया। करंट लगने की आशंका को देखते हुए लिफ्टें बंद की गईं। सीएमओ कार्यालय से संबंधित फ्लोर पर तीनों शिफ्ट में गार्ड लगाने की मांग की गई है। पानी की समस्या से राहत देने के लिए जल निगम से हर तीन से चार घंटे में पानी के टैंकर मंगवाए जा रहे हैं।