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Noida News: लिफ्ट है..... पर सुविधा नहीं, गर्भवती महिलाएं सीढि़यां चढ़ने को मजबूर

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- तीन लिफ्ट स्टाफ के लिए आरक्षित, एक खराब, दो के भरोसे 2200 मरीज
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- स्ट्रेचर पर दर्द से कराहता रहा मरीज, 10 मिनट बाद मिली लिफ्ट



माई सिटी रिपोर्टर

नोएडा। जिला अस्पताल के सेक्टर-39 में शिफ्ट होने के बाद मरीजों के लिए सुविधाएं बढ़ने की बजाय और कम हो गई हैं। कहने को तो अस्पताल में छह लिफ्ट लगी हुई है। लेकिन इसमें से तीन लिफ्ट स्वास्थ्य विभाग के स्टाफ व डॉक्टरों के लिए आरक्षित कर दी गई हैं। अन्य तीन लिफ्ट में से एक बंद है। सिर्फ दो लिफ्ट के भरोसे 2200 से ज्यादा मरीज हैं। मंगलवार को भी अस्पताल में कुछ ऐसा ही नजारा देखने को मिला। लिफ्ट बंद होने की वजह से स्ट्रेचर पर कराहते मरीज को चतुर्थ फ्लोर से नीचे लाने के लिए 10 से 15 मिनट का इंतजार करता पड़ा। अस्पताल में रैंप तक की भी व्यवस्था नहीं है। ऐसे में सीढि़यों से स्ट्रेचर से उतरना संभव ही नहीं है। अस्पताल के इन हालत पर मंगलवार को अमर उजाला संवाददाता नेहा शर्मा और फोटो जर्नलिस्ट राजन राय की लाइव रिपोर्ट।
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कभी खाली ही नहीं मिलती लिफ्ट:
अस्पताल में तीसरे फ्लोर पर गर्भवती महिलाओं के लिए ओपीडी, वॉर्ड और डिलिवरी रूम बनाए गए हैं। लिफ्ट कभी खाली न मिलने की वजह से मजबूरी में गर्भवती महिलाओं को सीढि़यों से तीसरे तल पर जाना पड़ रहा है। दोपहर करीब 12,30 बजे चोटपुर से जिला अस्पताल आई संगीता ने बताया कि एक लिफ्ट बंद है। अन्य दो में खड़े होने तक की जगह नहीं मिल पा रही है। इसलिए पैदल ही तीसरे मंजिल पर गई और अब आ रही हूं।
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डॉक्टरों का बर्ताव खराब, मरीजों को लौटाया:
वहीं तीमारदार मनोज कुमार दुबे ने बताया कि मेरी पत्नी का एक्सिडेंट हुआ है। इमरजेंसी में प्लास्टर करने के बाद डॉक्टर ने ओपीडी में भेजा दिया है। लेकिन यहां कोई डॉक्टर देखने को तैयार नहीं है। कर्मचारी ने कहा कि आप दूसरे कमरे में डॉक्टर को दिखा लीजिए, लेकिन जब वहां गए तो उन्होंने भी वापस भेज दिया। कुल मिलाकर तक तीन कमरों में जा चुका हूं, लेकिन सभी ने कमरों से बाहर निकाल दिया।
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इंटर्न के भरोसे छोड़ी फार्मेसी

दोपहर एक बजे तक जिला अस्पताल की फार्मेसी के बाहर लंबी लाइन लगी रही। इंटर्न मरीजों को दवाइयां दे रहे थे। इस वजह से मरीज को दवाई मिलने में समय लग रहा था। जिससे कुछ मरीजों की लड़ाई तक हो गई। थक हारकर कुछ मरीज लाइन में नीचे ही बैठ गए। बर्थ सर्टिफिकेट बनाने की सुविधा अभी तक अस्पताल में शुरू नहीं की जा सकी है।
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