यमुना सिटी (संवाद)। सलारपुर गांव में चल रही श्रीमद्भागवत कथा में दूसरे दिन कथा व्यास ने भक्तों को परीक्षित को श्राप, शुकदेव के आगमन और सृष्टि रचना के प्रसंग सुनाए। कथा व्यास ने बताया कि कुंती ने भगवान श्रीकृष्ण से सुख के बजाय दुख मांगा था। उनका मानना था कि सुख मिलने पर मनुष्य कई बार भगवान को भूल जाता है, जबकि दुख में वह प्रभु का स्मरण करता है। राजा परीक्षित ने शुकदेव से पूछा कि सात दिन में मृत्यु का श्राप मिलने पर मनुष्य के उद्धार का क्या उपाय है। इस पर शुकदेव ने श्रीमद्भागवत कथा के श्रवण की महत्ता बताई।