ग्रेटर नोएडा। तुस्याना भूमि घोटाले में शासन ने प्रशासन से आरोपी अफसरों की बंद लिफाफे में जांच रिपोर्ट मांगी है। इन अफसरों पर भूमाफिया का साथ देने का आरोप है। वहीं एसआईटी की जांच रिपोर्ट पूरी होने का भी इंतजार हो रहा है। बीते 30 मई को गठित एसआईटी को 15 दिन में रिपोर्ट देनी थी। टीम दो बार ग्रेटर नोएडा आकर जांच कर चुकी है। प्रशासन की रिपोर्ट में भूमाफियाओं के साथ गठजोड़ का पूरा चिट्ठा शामिल किया गया है। हाईकोर्ट के आदेश के बाद रिपोर्ट मांगे जाने को शासन स्तर से बड़ी कार्रवाई की आसार दिखने लगे हैं।
तुस्याना गांव में जमीन को नियमों के खिलाफ जाकर खरीदने-बेचने की शिकायत जिलाधिकारी को मिली थी। डीएम ने अपर जिलाधिकारी (वित्त एवं राजस्व) को जांच सौंपी थी। एडीएम की जांच रिपोर्ट पर डीएम ने शासन से उच्चस्तरीय जांच कराने की सिफारिश की। डीएम के पत्र पर शासन ने 30 मई, 2022 को एसआईटी गठित कर दी। यूपी राजस्व परिषद् के चेयरमैन की अध्यक्षता में तीन सदस्य एसआईटी से 15 दिन में जांच रिपोर्ट मांगी गई थी। एसआईटी की टीम दो बार ग्रेटर नोएडा आकर जांच कर चुकी है। प्राधिकरण और प्रशासन के अफसरों ने रिपोर्ट तैयार कर एसआईटी को सौंप दी है, लेकिन फिर भी अभी तक जांच पूरी नहीं हो सकी है। इसी बीच एक याचिका पर हाईकोर्ट ने प्रदेश सरकार से दो माह के अंदर तुस्याना भूमि घोटाले की जांच रिपोर्ट पेश करने का आदेश दिया है।
हाईकोर्ट के आदेश के बाद शासन ने बृहस्पतिवार को प्रशासन और प्राधिकरण से भी आरोपी अफसरों के नामों की सूची मांगी है और चार विभागों से उनके खिलाफ जांच रिपोर्ट बंद लिफाफे में भेजने को कहा है। इनमें चकबंदी, भूलेख, प्राधिकरण और भूअर्जन कार्यालय शामिल हैं। बताया जा रहा है कि इन अधिकारियों पर शासन स्तर से जल्द कार्रवाई होगी।
तुस्याना में कुर्क जमीन की हुई खरीद बिक्री
टीपीएल नाम की एक कंपनी ने प्रदेश सरकार से टेक्नोलॉजी पार्क बनाने के लिए जमीन खरीदने की अनुमति ली थी। कंपनी ने तुस्याना गांव में 200 एकड़ जमीन खरीदी थी। सरकार ने पहले टेक्नोलॉजी पार्क बनाने और उसके बाद आवासीय परिसर बनाने की शर्त रखी थी। आरोप है कि कंपनी ने टेक्नोलॉजी पार्क बनाने की जगह प्लाटिंग शुरू कर दी। इसकी जानकारी मिलते ही शासन से कंपनी को दी अनुमति रद्द कर दी। कंपनी से खरीदी गई जमीन वापस ली जानी थी, लेकिन शासन के इस आदेश का पालन नहीं कराया गया। इस बीच कंपनी हाईकोर्ट चली गई। जांच में पता चला कि वहां कंपनी ने मानचित्र स्वीकृत नहीं होने का दावा किया। हाईकोर्ट ने मानचित्र स्वीकृत करने पर रिपोर्ट मांगी। इस बीच ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण अस्तित्व में आ गया। उसके बाद जमीन का मामला कंपनी और प्राधिकरण के बीच हो गया। जो आज तक तय नहीं हो सका है। वहीं सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर कंपनी की सभी जमीन को कुर्क किया गया। इसी बीच भूमाफिया सक्रिय हो गए। उन्होंने कुर्क जमीन को नियमों के खिलाफ जाकर खरीदा लिया। कुछ प्राधिकरण को जमीन बेच दी। करीब 100 करोड़ का घोटाला करने आरोप है। कृषक भूखंड भी आवंटित करा लिया गया।