(मुख्य स्टोरी पेज एक पर जा रही है)
कफ सिरप बनाने वाली कंपनी का लाइसेंस होगा रद्द
- खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन का शिकंजा कसा, 9 जनवरी से बंद है उत्पादन
माई सिटी रिपोर्टर
नोएडा। मानकों पर फेल कफ सिरप बनाने वाली नोएडा के सेक्टर-67 स्थित कंपनी मैरियन बाॅयोटेक लिमिटेड पर खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन का शिकंजा कसने लगा है। इस मामले में मुकदमा दर्ज होने के बाद विभाग ने कंपनी का लाइसेंस रद्द करने की तैयारी शुरू कर दी है। इस कंपनी में 9 जनवरी को दवाओं का उत्पादन बंद करा दिया गया था, जबकि 12 जनवरी को लाइसेंस निलंबित कर दिया गया था।
दिसंबर में उज्बेकिस्तान सरकार ने आरोप लगाया था कि नोएडा की कंपनी के कफ सिरप डॉक-1 मैक्स और एंबरोनाल पीने से वहां 18 बच्चों की मौत हो गई। उज्बेकिस्तान सरकार की सूचना के आधार पर डब्ल्यूएचओ ने भारत सरकार को इस मामले में चेताया था। जिसके बाद केंद्र और राज्य की टीमों ने कंपनी पहुंचकर दवाओं के नमूने एकत्र किए थे। कुल 36 नमूने लेकर जांच के लिए भेजे गए थे, जिनमें से 22 नमूने मानकों पर खरे नहीं उतरे।
प्रयोगशाला विश्लेषण में पाया गया कि दोनों उत्पादों में दूषित पदार्थों के रूप में डायथिलीन ग्लाइकॉल एथिलीन ग्लाइकॉल का अधिक मात्रा में इस्तेमाल किया गया। जिला औषधि निरीक्षक वैभव बब्बर ने बताया कि जांच के बाद केवल प्रतिबंधित दवाओं का उत्पादन ही बंद किया गया था, लेकिन बाद में कंपनी का लाइसेंस निलंबित कर दिया गया था, जिसे अब रद्द करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।
मई 2021 में निर्यात हुआ था सिरप
अधिकारियों के मुताबिक कंपनी मैरियन बायोटेक लिमिटेड वर्ष 2012 से उज्बेकिस्तान मेंं रजिस्टर्ड थी। यह कंपनी भारत में अपनी दवाएं नहीं बेचती। जिन दवाओं के सेवन से बच्चों की मौत की शिकायत मिली उनकी खेप मई 2021 में उज्बेकिस्तान भेजी गई थी।
दो माह में 35 लाइसेंस रद्द
जनपद में दवाओं के कारोबार में धांधली की लगातार शिकायतें मिल रही हैं। उज्बेकिस्तान मामले के बाद अलर्ट औषधि विभाग ने विशेष जांच अभियान चलाया। करीब दो माह में 20 दवा कंपनियों और फार्मेसी के लाइसेंस निलंबित किए गए। जबकि 35 के लाइसेंस रद्द किए जा चुके हैं। अधिकारियों ने बताया कि बिना लाइसेंस दवाओं का उत्पादन और बिक्री करने पर आठ और दवाओं के नमूने मानकों पर खरे नहीं उतरने पर तीन लोगों के खिलाफ मुकदमें दर्ज कराए गए हैं।
2006 में हुआ था भूखंड का आवंटन
सेक्टर-67 स्थित मैरियन बायोटेक कंपनी को भूखंड का आवंटन साल 2006 में हुआ था, जबकि 2010 में कंपनी को क्रियाशील प्रमाणपत्र दिया गया था। कंपनी कॉस्मैटिक्स और ब्यूटी प्रोडक्ट भी बनाती है। कंपनी 700 वर्गमीटर से अधिक क्षेत्रफल में बनी हुई है।
कंपनी मालिक और मालकिन फरार
नोएडा। उजबेकिस्तान में कफ सिरप पीने से हुई 18 बच्चों की मौत के मामले में दवा कंपनी के ऑपरेशन हेड समेत तीन कर्मचारियों की गिरफ्तारी के बाद कंपनी मालिक और मालकिन (डायरेक्टर) सचिन जैन और जया जैन फरार हैं। नोएडा सेंट्रल के डीसीपी रामबदन सिंह के मुताबिक मामले में ऑपरेशन हेड तुहिन भट्टाचार्य, केमिस्ट अतुल रावत और मूल सिंह को गिरफ्तार किया गया है। पुलिस फरार कंपनी मालिक और मालकिन की तलाश में जुटी है। ब्यूरो
चंडीगढ़ में जांच के बाद दर्ज कराई गई एफआईआर
मामले की जांच केंद्र और राज्य की औषधि विभाग ने की थी। औषधि विभाग ने कंपनी से सिरप का सैंपल लेकर चंडीगढ़ के प्रयोगशाला में जांच कराई। जांच में 36 में 22 सैंपल के फेल होने के बाद ड्रग इंस्पेक्टर आशीष कोन्डल ने कोतवाली फेज थ्री में औषधि और प्रसाधन सामग्री अधिनियम 1940 के तहत मुकदमा दर्ज कराया था।