रबूपुरा(संवाद)। श्रीमद् भागवत कथा आयोजन समिति के तत्वाधान में मोहल्ला मीणा ठाकुरान स्थित धर्मशाला में श्रीमद् भागवत कथा ज्ञान यज्ञ के तीसरे दिन वृंदावन धाम से आए कथावाचक उमानंद शास्त्री ने कहा कि दान से बड़ा दान देने वाला होता है। दानी व्यक्ति भगवान बहुत ही नजदीक होते हैं और भगवान उनसे स्नेह करते हैं। राजा बलि की कथा विस्तार से सुनते उन्होंने कहा कि राजा बलि बहुत बड़े दानी थे। एक बार नारायण ने उनकी परीक्षा लेने का निर्णय लिया और वह वराह भगवान का रूप धारण कर राजा बलि के दरबार में आए। वराह भगवान कहते हैं कि मुझे केवल तीन पग जमीन चाहिए तब राजा बली के गुरु शुक्राचार्य भांप जाते हैं कि यह तो स्वयं भगवान विष्णु हैं। वह राजा बलि को समझते हैं परंतु राजा बलि दान देने से मना नहीं करते हैं। इस दौरान गोपाल मीणा, महेश, राजवीर सिंह, सुरेंद्र मीणा, दुष्यंत, हरवीर, सरोज देवी, राखी, गायत्री, राजवती, गुड्डी, रेखा आदि मौजूद रहे।