संशोधित ...बाइक बोट फर्जीवाड़ा...
चुनावी मौसम में फिर बोतल से बाहर आया घोटाले का जिन्न
- विधानसभा चुनाव से पहले सीबीआई ने दर्ज किया था केस, लोकसभा चुनाव से पहले ईडी ने कसा शिकंजा
- बसपा और सपा के नेताओं को हो चुकी है जेल, जांच हुई तो अफसर-नेताओं के गठजोड़ का होगा खुलासा
जेपी शर्मा
ग्रेटर नोएडा। नेताओं और अफसरों के गठजोड़ से देश के लाखों लोगों से बाइक बोट के नाम पर अरबों रुपये के फर्जीवाड़े का जिन्न चुनावी मौसम में एक बार फिर बोतल से बाहर आ गया है। लोकसभा चुनाव की तैयारियों के बीच अब इस केस की जांच प्रवर्तन निदेशालय के दिल्ली मुख्यालय को दी गई है। इससे पहले उत्तर प्रदेश विधान सभा से पहले नवंबर 2021 में सीबीआई ने इस मामले में केस दर्ज कर जांच शुरू की, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं कर पाई। इस केस में यूपी पुलिस, ईओडब्ल्यू, ईडी, सीबीआई समेत कई एजेंसियों ने जांच की है। आरोपियों पर कार्रवाई तो हुई, लेकिन कई बड़े अपराधी अभी फरार हैं। आरोपियों की संपत्ति भी पूरी तरह कुर्क नहीं की गई है और निवेशकों को उनका रुपया लौटाने के लिए कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। अब देखने वाली बात यह होगी की ईडी मुख्यालय की टीम बड़े अपराधियों पर कार्रवाई और निवेशकों को रुपया दिला पाएगी या नहीं।
बाइक बोट फर्जीवाड़े के दौरान मुख्य आरोपी संजय भाटी गौतमबुद्ध नगर बसपा के लोकसभा प्रभारी पद पर काम कर रहा था। चर्चा थी कि बसपा के टिकट पर संजय भाटी लाेकसभा का चुनाव लड़ेगा। लेकिन फर्जीवाड़े का खुलासा होने के बाद संजय भाटी का टिकट पार्टी ने काट दिया। बाइक बोट फर्जीवाड़े की रकम से बसपा के कुछ नेताओं को लाभ पहुंचाने की बात सामने आई थी। इस केस में गौतमबुद्ध नगर के रहने वाले राजस्थान के बसपा विधायक जोगेंद्र अवाना पर भी केस दर्ज किया गया था। बाइक बोट की गर्वित इनोवेटिव कंपनी के कार्यक्रमों में कुछ अधिकारियों की मौजूदगी और बेखौफ दफ्तर खोलकर ठगी करने से से नेता, अफसरों की आरोपियों से गठजोड़ के आरोप लगे थे। इसी वर्ष जुलाई में सपा नेता दिनेश गुर्जर को ईडी ने गिरफ्तार किया था। रिमांड पर पूछताछ के बाद एकबार फिर बड़े अफसर से सांठ-गांठ के आरोप लगे हैं। इसके बाद ही ईडी मुख्यालय की टीम को केस की जांच सौंपी गई है। सुप्रीम कोर्ट के एक ही कोर्ट में मामलों की सुनवाई के आदेश के बाद सीबीआई ने जांच ईओडब्लयू को वापस कर दी थी।
पांच लाख की इनामी दीप्ति समेत कई आरोपी फरार
पुलिस ने मुख्य आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेजा था। आरोपियों पर गैंगस्टर की कार्रवाई कर पुलिस, ईओडब्ल्यू और ईडी ने कई बार संपत्ति भी कुर्क की। 1093 वाहनों को जब्त किया गया। इनमें मर्सिडिज, जगुआर, ऑडी और फाॅरच्यूनर जैसी करीब 50 लग्जरी कार थीं। लेकिन संजय भाटी की पत्नी पांच लाख की इनामी दीप्ति बहल, भूदेव, संजय भाटी की निजी सचिन रीता चौधरी समेत कई आरोपी अभी फरार हैं। इसके अलावा अभी भी करोड़ों की संपत्ति कुर्क होना बाकी है।
हजारों लोगों, सैनिकों और पूर्व सैनिकों को बनाया शिकार
फर्जीवाड़े के आरोपियों ने दादरी के कोट गांव में दफ्तर खोलकर सोशल मीडिया के माध्यम से देश के हजारों लोगों, सैनिकों व पूर्व सैनिकों को 62 हजार रुपये जमा कराकर लगभग दस हजार रुपये प्रतिमाह किश्त एक साल तक देने का झांसा देकर ठगी का शिकार बनाया। मामले में पहला केस जयपुर के सुनील मीणा ने जनवरी 2019 में दर्ज कराया। 100 से अधिक केस दादरी कोतवाली में दर्ज हुए। इसके अलावा विभिन्न प्रदेशों में भी आरोपियों के खिलाफ केस दर्ज किए गए। पुलिस की केस डायरी में 38 आरोपियों के नाम थे, ईओडब्ल्यू और ईडी की जांच में भी कई नाम सामने आए।
दलालों-बिचौलियों पर शिकंजा कसना बाकी
फर्जीवाड़े की रकम खपाने में गौतमबुद्ध नगर, बुलंदशहर, मेरठ समेत जिलों के कई दलाल, बिचौलिये और सफेदपोशों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। इनमें कुछ नाम सामने आए हैं। लेकिन अभी कई और आरोपियों के नाम सामने आना बाकी है। इनमें वह बिचौलिये भी शामिल हैं, जिन्होंने आरोपियों की कुछ अफसरों से सांठ-गांठ कराई है।
हम एक जून 2019 से बाइक बोट के मुख्य दफ्तर पर धरना देकर निवेशकों का रुपया वापस दिलाने की मांग कर रहे हैं। फर्जीवाड़े में कई नेता व अधिकारियों की आरोपियों से मिलीभगत थी। इन पर कार्रवाई नहीं हुई है। अभी तक मुख्य दफ्तर समेत देश विदेश में पीड़ितों की ठगी की रकम से खरीदी गई संपति को कुर्क नहीं किया गया। फर्जीवाड़े की रकम मांगने पर संजय भाटी ने निवेशकों से वीडियो कॉलिंग पर कहा था कि वह चुनाव के बाद हिसाब करेगा। फर्जीवाड़े का इलेक्शन से क्या कनेक्शन है, निवेशक सवाल पूछते रहे हैं।
मुन्ना बालियान, धरनारत पीड़ित निवेशक
एजेंसियों ने जब पूरी तरह से कार्रवाई नहीं की और निवेशकों को रुपया नहीं दिलाया, तब जम्मू और आसपास के निवेशकों को एकत्रित कर सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। लेकिन अभी केवल तारीख मिल रही हैं। शुक्रवार को भी सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई होनी है। चुनाव निकट आने पर एक बार फिर जांच बड़ी एजेंसी को गई है। पूर्व में बड़े आरोपी बचते रहे हैं। इन पर भी कार्रवाई होनी चाहिए।
- सुरेश, सुप्रीम कोर्ट में केस लड़ रहे जम्मू के निवेशक