93 लावारिसों की अस्थियां गंगा की गोद में समाई
अंतिम निवास में रखी गई थीं, लोकमंच संस्था ने सोरों में गंगा में किया विसर्जन
संवाद न्यूज एजेंसी
नोएडा। किसी की अस्थियों को अपनों का इंतजार था तो किसी की कोई न होने की वजह से शमशान घाट के लॉकर में मोक्ष का इंतजार कर रही थीं। इस तरह के 93 लावारिस लोगों की अस्थियों की तपस्या श्राद्ध पक्ष में पूरी हो गई। आखिरकार उन्हें मां गंगा की गोद नसीब हो ही गई। हां पर शायद उन्हें अपनों के हाथों से संंसार से आखिरी विदाई न हो पाने का मलाल जरूर रहेगा।
सेक्टर-94 स्थित अंतिम निवास का प्रबंधन करने वाली संस्था लोकमंच के महासचिव महेश सक्सेना ने बताया कि रविवार को श्राद्ध पक्ष में लावारिस अस्थियों को सोरों में गंगा में विसर्जित किया गया। 93 अस्थि कलशों का विधिविधान के साथ विसर्जन हुआ। अस्थियों को पिंटू शर्मा व रोबिन लेकर गए थे। उन्होंने बताया कि साल में तीन से चार बार अंतिम निवास में रखी लावारिस अस्थियों का विसर्जन किया जाता है। बताया जाता है कि श्राद्ध पक्ष में यदि किसी का पिंडदान किया जाए तो मोक्ष की प्राति होती है। इसलिए कर्मकांड के विद्वानों द्वारा पिंडदान भी कराया गया।
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कुछ अस्थियां अब भी जोह रहीं बाट
अंतिम निवास में कुछ अस्थियां ऐसी भी हैं जो सालों से अपनों की बाट जोह रही हैं। अंतिम निवास के प्रबंधकों ने बताया कि यह वह लोग हैं, जिनके परिजन विदेशों में रहते हैं। निवास में ऐसे 8 से 10 अस्थि कलश हैं जो कई सालों से रखे हुए हैं। उन्होंने कहा कि हर बार इसके घरवालों को फोन करने पर जवाब आता है कि कुछ दिन और रुक जाइए, वह कलश लेने के लिए आ ही रहे हैं, लेकिन अब तक कोई नहीं आया।