गाजियाबाद। एक जुलाई 2017 को जब केंद्रीय वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) लागू किया गया, तब मेरठ जोन (पश्चिम यूपी व उत्तराखंड) में कर दाताओं की संख्या लगभग डेढ़ लाख थी लेकिन, सात साल में यह संख्या लगभग चार गुना बढ़कर चार लाख से ज्यादा हो गई है।
जीएसटी लागू होने से कर प्रणाली में सरलता आने के साथ पारदर्शिता आई है। इसी का नतीजा है कि वित्त वर्ष 2017-18 से पहले 23 प्रकार के अलग-अलग करों को मिलाकर 15 हजार करोड़ रुपया कर मिलता था। वित्तीय वर्ष 2023-24 में यह आंकड़ा 40 हजार करोड़ तक पहुंच गया है। सोमवार को जीएसटी दिवस के अवसर पर आईएमएस कॉलेज में केंद्रीय जीएसटी की ओर से आयोजित कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मेरठ जोन के मुख्य आयुक्त राजीव जैन ने यह बातें कहीं।
उन्होंने कहा कि जीएसटी ऐसा सुधार है, जिसने भारत के कराधान व्यवस्था को पूरी तरह बदलकर रख दिया है। देश में सात साल पहले जीएसटी के नियमों का अनुपालन आसान हुआ है। साथ ही कर संग्रह बढ़ने के साथ राज्यों के राजस्व में भी वृद्धि हुई है। हालांकि, फर्जी चालान और धोखे से पंजीकरण की घटनाएं करदाताओं के लिए अब भी बड़ी चुनौती बनी है। जीएसटी अपीलीय न्यायाधिकरण की स्थापना से कारोबारियों के लिए विवाद समाधान प्रक्रिया आसान हुई है और इसमें तेजी आई है।
मुख्य आयुक्त ने ईज ऑफ डूइंग बिजनेस को बढ़ावा देने के लिए करदाताओं से संवाद स्थापित कर समस्याओं का समाधान करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि भारत को पांच ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने में जीएसटी का बड़ा योगदान रहेगा। इस दिशा में हमें अभी बहुत कुछ करना होगा। सीजीएसटी नोएडा के प्रधान आयुक्त गौरव कुमार ने कहा कि जीएसटी ने भारतीय अर्थव्यवस्था में बड़ा बदलाव किया है।
जीएसटी परिषद ने बेहतर तरीके से केंद्र और राज्य सरकार के बीच समन्वय स्थापित करने का काम किया है। करों से संबंधित सभी मामलों पर कठिन निर्णय सर्वसम्मति से लिए गए, जो एक बड़ी उपलब्धि है। इस मौके पर कस्टम के प्रधान आयुक्त अखिल खत्री, डीजीजीआई के अतिरिक्त आयुक्त सतेंद्र मथूरिया, ऑडिट मेरठ के आयुक्त योगेश अग्रवाल, गाजियाबाद के आयुक्त संजय लवानिया, गौतमबुद्धनगर के आयुक्त दिनेश कुमार गुप्ता, नोएडा के प्रधान आयुक्त अपील मिहिर कुमार, मेरठ के प्रधान आयुक्त प्रेम वर्मा सहित कई अधिकारी मौजूद रहे।
फर्जी पंजीकरण अब भी चुनौती
कार्यकम को संबोधित करते हुए राज्य कर विभाग के अपर आयुक्त ग्रेड-1 दिनेश मिश्रा ने कहा कि केंद्रीय बिक्री कर, राज्य बिक्री कर, वैल्यू एडेड टैक्स (वैट) और चुंगी कर व्यवस्था समेत कई प्रकार के करों को मिलाकर बनाए गए जीएसटी के तहत राजस्व की वसूली करना सरकार के सामने एक बड़ी चुनौती थी. इसके लिए उसने जीएसटीएन यानी जीएसटी नेटवर्क तैयार किया। जिसके जरिए राजस्व की वसूली करना आसान हुआ। केंद्रीय और राज्य जीएसटी के बीच बेहतर तालमेल से लक्ष्य पाना आसान हो गया है, लेकिन फर्जी जीएसटी पंजीयन अब भी चुनौती बने हुए हैं। इससे निपटने के लिए कदम उठाए जा रहे हैं।