योगदा सत्संग सोसाइटी ऑफ इंडिया और सेल्फ़-रियलाइजेशन फेलोशिप के अध्यक्ष और आध्यात्मिक प्रमुख स्वामी चिदानन्द गिरि की अध्यक्षता में रविवार को नोएडा के सेक्टर 62 स्थित आश्रम में सत्संग कार्यक्रम का आयोजन किया गया। स्वामी चिदानन्द गिरि अमेरिका के कैलिफोर्निया में स्थित सेल्फ-रियलाइजेशन फेलोशिप मुख्यालय से एक माह की भारत यात्रा पर आए हुए हैं। दुनियाभर के वाईएसएस/एसआरएफ भक्तों की सुविधा के लिए इस विशेष कार्यक्रम का सीधा प्रसारण भी किया गया।
इस सत्संग कार्यक्रम में बड़ी संख्या में योगदा सत्संग सोसाइटी के अनुयायी समेत 1200 से अधिक श्रद्धालु पहुंचे। इसी के साथ ही दुनिया भर में फैले अनुयायी वर्चुअल तरीके से इस सत्संग कार्यक्रम से जुड़े। स्वामी चिदानन्दजी, वाईएसएस/एसआरएफ के अध्यक्ष एवं आध्यात्मिक प्रमुख, ने 'Autobiography of a Yogi' के हिन्दी संस्करण, 'योगी कथामृत' पुस्तक का विमोचन भी किया।
इस दौरान उन्होंने कहा कि योग हमारे जीवन को दिव्य बनाने का व्यावहारिक मार्ग है। क्रियायोग के अभ्यास और उसके द्वारा उत्पन्न स्थिर एवं निश्चल अवस्था में अपनी चेतना को केंद्रित करने से अन्तर्ज्ञान का विकास होना प्रारंभ हो जाता है। क्रियायोग से प्रमस्तिष्क-मेरुदण्डीय केन्द्रों में शक्ति स्थानान्तरित होने लगती है और मेरुदण्ड और मस्तिष्क में स्थित दिव्य अनुभूति के चक्र जाग्रत होने लगते हैं।
श्री श्री परमहंस योगानन्द द्वारा 100 साल पूर्व योगदा सत्संग सोसाइटी ऑफ इंडिया और सेल्फ रियलाइजेशन फेलोशिप की स्थापना की गई थी। मौजूदा समय में स्वामी चिदानन्द गिरि इस संस्था के अध्यक्ष और आध्यात्मिक प्रमुख हैं। स्वामी चिदानन्द 40 से भी ज्यादा सालों से वाईएसएस और एसआरएफ के संन्यासी रहे हैं। स्वामी जी संयुक्त राज्य अमेरिका, कनाडा, यूरोप और भारत में स्वामी योगानन्दजी की शिक्षाओं पर व्याख्यान दे चुके हैं और स्वामी योगानन्दजी की शिक्षाओं को पूरी दुनिया में प्रसार कर रहे हैं।
साल 1970 के दशक के शुरुआती सालों में जब स्वामी चिदानन्दजी अमेरिका के कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय में समाजशास्त्र और दर्शनशास्त्र की पढ़ाई कर रहे थे। उसी दौरान एनसीनीट्स, कैलिफोर्निया में उनका संपर्क स्वामी योगानन्दजी की शिक्षाओं से हुआ। इसके बाद उन्होंने स्वामी योगानन्द द्वारा लिखित किताब योगी कथामृत पढ़ी। वह इस किताब से इतना प्रभावित हुए कि वह 1977 में एनसीनीटस में सेल्फ रियलाइजेशन फेलोशिप के तहत संन्यासी बन गए।