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साइट पर नए निर्माण को लेकर सुपरटेक और आरडब्ल्यूए आमने-सामने

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नोएडा। ट्विन टावर ध्वस्तीकरण के अभी चंद दिन हुए हैं, लेकिन उक्त साइट पर नए निर्माण को लेकर सुपरटेक और एमराल्ड कोर्ट आरडब्ल्यूए आमने-सामने आ गए हैं। सुपरटेक वहां नए निर्माण की योजना लाने की बात कह रहा है, जबकि आरडब्ल्यूए इसका विरोध कर रहा है। सुपरटेक का यह भी कहना है कि अगर प्राधिकरण इसकी अनुमति नहीं देता है तो वह जमीन और ब्याज का पैसा वापस मांगेंगे। ऐसे में यहां एक और नया विवाद शुरू हो गया है।
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दरअसल, ट्विन टावर गिरने के बाद सुपरटेक ने खाली जमीन पर नया प्रोजेक्ट लाने की योजना बनाई है। सुपरटेक के चेयरमैन आरके अरोड़ा का कहना है कि यहां नया प्रोजेक्ट लेकर आएंगे। अगर प्राधिकरण इसकी इजाजत नहीं देता है तो फिर वह जमीन की कीमत के अलावा दूसरे खर्चे की वापसी की मांग करेंगे। हालांकि उनका कहना है कि नए प्रोजेक्ट के शुरू करने से पहले वह आरडब्ल्यूए से भी सहमति लेंगे।
अरोड़ा का कहना है कि प्राधिकरण ने सेक्टर-93ए में ग्रुप हाउसिंग प्रोजेक्ट के लिए 14 एकड़ जमीन आवंटित की थी। इसमें से दो एकड़ में ट्विन टावर का निर्माण किया गया था। उक्त जमीन पर मंदिर बनाने के लिए आरडब्ल्यूए के प्रस्ताव पर उनका कहना है कि ऐसा करने से पहले आरडब्ल्यूए के पास जमीन होनी चाहिए। यह जमीन हमें आवंटित की गई है।
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वहीं, एमराल्ड कोर्ट आरडब्ल्यूए के अध्यक्ष यूबीएस तेवतिया का कहना है कि ट्विन टावर साइट पर सुपरटेक के किसी भी तरह के प्रोजेक्ट का विरोध करेंगे। जरूरत पड़ी तो वे कोर्ट भी जाएंगे। ट्विन टावर को अवैध तरीके से ग्रीन एरिया की जमीन पर बनाया गया था, यहां पार्क होना चाहिए। कुछ निवासियों ने यहां मंदिर बनाने का प्रस्ताव दिया है। इसके लिए वह निवासियों के साथ बैठक करेंगे। इसी के मुताबिक फैसला लिया जाएगा। उधर, आरडब्ल्यूए के पूर्व अध्यक्ष राजेश राणा ने भी बिल्डर के प्रस्ताव का विरोध किया। उनका कहना है कि यह कोर्ट के फैसले को चुनौती देने जैसा है। ट्विन टावर गिराए जाने के बाद निवासी बेहतर महसूस कर रहे हैं।
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80 करोड़ की है जमीन
सुपरटेक का कहना है कि वर्तमान समय में ट्विन टावर साइट की जमीन की कीमत 80 करोड़ रुपये है। इसके अलावा उन लोगों ने खरीद योग्य एफएआर के लिए 25 करोड़ प्राधिकरण को दिए हैं। ट्विन टावर गिराने पर ब्रांड को नुकसान पहुंचने की बात अरोड़ा ने की, लेकिन उनका कहना है कि जो भी अप्रूवल प्राधिकरण से लिए गए थे, वह सब सही थे। अब कंपनी की ओर से ग्राहकों को बताया जा रहा है कि ध्वस्तीकरण का असर कंपनी पर नहीं पड़ा है। कंपनी अधूरे निर्माण को पूरा कर समय से कब्जा देगी। सुपरटेक प्रबंधन का कहना है कि कंपनी अब तक 70 हजार यूनिट की डिलीवरी दी जा चुकी है और अगले दो वर्षों में 20 हजार फ्लैट खरीदारों को कब्जा दिया जाएगा।
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28 अगस्त को गिरा दिए गए हैं ट्विन टावर
सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद एमराल्ड कोर्ट के ट्विन टावर 28 अगस्त को गिरा दिए गए। ट्विन टावर गिरने से सुपरटेक ने 500 करोड़ के नुकसान की बात कही थी। वहीं उन टावरों की वर्तमान कीमत 700 करोड़ रुपये बताई थी। इसे एडिफिस इंजीनियरिंग ने जेट डिमोलिशन की तकनीकी विशेषज्ञों की मदद से गिराया।
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