सुखपाल हत्याकांड :
ससुराल की रंजिश में पैरवी पर की थी हत्या, दो साजिशकर्ता गिरफ्तार
- ग्रेनो वेस्ट के सुनपुरा गांव में साले के दोस्त की मौत के बाद से चल रहा था विवाद
- जेल में बंद शूटर को वारदात के लिए दिलाई थी जमानत, गिरफ्तारी के लिए दबिश
माई सिटी रिपोर्टर
ग्रेटर नोएडा/ दादरी। प्रोपर्टी डीलर सुखपाल गौतम की हत्या में साजिशकर्ता सुनपुरा गांव के रतन सिंह (55) और गाजियाबाद के अमराला निवासी साजिद सैफी (21) को गिरफ्तार किया है। खुलासा हुआ है कि सुनपुरा गांव में ससुराल पक्ष की रंजिश में पैरवी करने पर सुखपाल की हत्या की गई थी। रतन सिंह के बेटे नीशू उर्फ करन सिंह ने वारदात के लिए डासना जेल में बंद पिलखुआ के शादाब की जमानत कराई थी। शादाब और नीशू ने वारदात को अंजाम दिया था। पुलिस इन सहित अन्य आरोपियों की तलाश कर रही है।
11 जनवरी को कासना निवासी सुखपाल कांशीराम कालोनी की तरफ जा रहे थे। इसी दौरान बाइक सवार दो बदमाशों ने सुखपाल की दो गोलियां मारकर हत्या कर दी थी। पुलिस जांच में जुटी हुई थी। मंगलवार को इस मामले में दादरी क्षेत्र के आमका रूपवास गांव के पास पुलिस ने चैकिंग के दौरान बाइक सवार सुनपुरा गांव निवासी रतन सिंह और साजिद को गिरफ्तार कर पूछताछ की। पूछताछ में आरोपियों ने सुखपाल हत्याकांड की साजिश में शामिल होने का अपराध कबूल किया। पुलिस ने दोनों आरोपियों के पास से तमंचा बरामद किया है।
आरोपियों की सुखपाल के साले से है रंजिश
डीसीपी साद मियां ने बताया कि सुनपुरा निवासी सुखपाल का साला रोहित की गांव के ही प्रवीण से दोस्ती थी। साल 2019 में रोहित व प्रवीण फेस-2 थाना क्षेत्र के याकूबपुर में लूट की घटना को अंजाम देकर भाग रहे थे। तभी भीड़ ने प्रवीण को पकड़कर पीटकर मार डाला था। रोहित लोगों से बचकर भागने में कामयाब हो गया था। परिजनों को शक था कि प्रवीण की हत्या में रोहित का हाथ था। इससे प्रवीण के पिता रतन सिंह और भाई नीशू रोहित से रंजिश मानने लगे थे। नीशू ने साल 2020 में रोहित के पिता रामकिशोर पर फायरिंग की थी, हालांकि जानलेवा हमले में वे बच गए थे। इसके बाद रामकिशोर पर चाकू से 14 वार कर जानलेवा हमला किया गया। इस घटना के बाद से रामकिशोर गांव छोड़कर बाहर रहने लगे थे। सुखपाल अपने ससुराल पक्ष के लिए पैरवी कर रहे थे। इसके चलते रतन सिंह और नीशू ने सुखपाल को रास्ते से हटाने की योजना बना ली। नीशू और शादाब ने रेकी कर वारदात को अंजाम दिया।
समझौता नहीं होने और पैरवी से सजा होने का था डर
पुलिस का कहना है कि सुखपाल के ससुराल पक्ष और रतन के परिवार की रंजिश को लेकर गांव में पंचायत भी हुई थी। इसमें पांच लाख रुपये में दोनों पक्षों में समझौते की बात रखी गई। सुखपाल ने यह कहकर समझौता करने से इंकार कर दिया था कि कहीं रुपये लेकर भी आरोपी अपनी हरकत से बात न आएं। वह ससुराल पक्ष की पैरवी में जुटे रहे। इससे रतन सिंह व नीशू को जानलेवा हमले के मामले में सजा होने का डर सताने लगा था।
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दोषियों पर कड़ी कार्रवाई हो
सुखपाल के भाई विकल का कहना है कि सुनपुरा गांव में समझौते की पंचायत में उनके भाई नहीं गए थे। रोहित के कारनामों के कारण सुखपाल व उनके परिवार ने ससुराल के विवाद से काफी दिन पहले खुद को अलग कर लिया था। इस मामले में रेकी करने वाले लोगों के वीडियो पुलिस को सौंपे गए हैं, उनकी भी गिरफ्तारी की जानी चाहिए। विकल का कहना है कि उनके भाई की हत्या के सभी दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की जाए। निर्दोषों को परेशान नहीं किया जाए।
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डासना जेल में बंद थे आरोपी, छूटकर दिल्ली में की लूट
पुलिस का कहना है कि फरार आरोपी नीशू, साजिद व हापुड़ के देवली गांव का शादाब डासना जेल में बंद थे। वारदात के लिए रतन सिंह ने अपने बेटे नीशू के साथ साजिद व शादाब की भी जमानत कराई थी। शादाब व साजिद के लिए पिलखुआ में किराये के मकान का भी बंदोबस्त किया। इसके बाद आरोपियों ने दिल्ली में भी लूट की वारदात को अंजाम दिया था। आरोपियों को दिल्ली पुलिस भी तलाश रही है। नीशू पर 25 और साजिद सैफी पर नौ केस अलग-अलग थानों में दर्ज हैं।