जिला अस्पताल के शौचालयों से टोटियां चोरी, फ्लैटों से शावर भी गायब
- सेक्टर-39 में 546 करोड़ से बनी आठ मंजिला आलीशान बिल्डिंग को लगी चोरों की नजर
- परेशान अस्पताल प्रशासन ने स्टील फिटिंग हटवाकर प्लास्टिक की टोटियां लगवाईं
माई सिटी रिपोर्टर
नोएडा। सेक्टर-39 स्थित जिला अस्पताल की आठ मंजिला इमारत को चोरों की नजर लग गई है। करीब 546 करोड़ रुपये की लागत से बनी अस्पताल की इमारत के शौचालयों से चोर टोटियां तक खोलकर ले गए। अस्पताल के पिछले हिस्से में बने आवासीय फ्लैटों के बाथरूम से शावर भी गायब हैं। इतना ही नहीं चोरों ने दरवाजों पर लगे हैंडल और कुंडियां भी नहीं छोड़ीं।
इसका खुलासा तब हुआ जब पिछले दिनों अस्पताल के भूतल पर बनी फार्मेसी की छत से पानी टपकने लगा। जांच की गई तो फार्मेसी के ऊपरी मंजिल पर बने शौचालयों में लगी टोटियां गायब मिलीं। पानी का रिसाव निचली मंजिल तक पहुंच गया और जगह-जगह से छत से पानी टपकने से फॉल सीलिंग खराब हो गई। इसके बाद अस्पताल प्रशासन ने पूरी इमारत की जांच कराई तो पता चला कि ज्यादातर शौचालयों से पाइप सहित टोटियां गायब हो चुकी हैं। इस हरकत से हैरान-परेशान अस्पताल प्रशासन को ब्रांडेड स्टील फिटिंग हटवाकर प्लास्टिक की टोटियां लगवानी पड़ी हैं।
आवासीय इमारत में चल रहे अवैध काम
जिला अस्पताल की आठ मंजिला आलीशान इमारत के पीछे ही दो आवासीय टावरों में 62 फ्लैट भी बने हुए हैं, जिनमें से अधिकांश खाली पड़े हैं। इनके दुरुपयोग की शिकायतें भी अस्पताल प्रशासन को मिलती रही हैं। खाली फ्लैटों से शराब और बीयर की खाली बोतलें अक्सर मिल जाती हैं। अधिकांश फ्लैटों के बाथरूम से टोटी-शावर चोरी हो चुके हैं। अब जिन्हें यह फ्लैट अलॉट होते हैं उन्हें अपने खर्च पर टोटी-शावर लगवाने पड़ रहे हैं।
पहले भी हाथ साफ कर चुके चोर
दरअसल, सेक्टर-39 में अस्पताल की इमारत साल 2019 में ही बनकर तैयार हो गई थी। शिफ्ट होने से पहले कोरोना महामारी फैल गई। अगस्त 2020 में इसे अस्थायी कोविड अस्पताल बना दिया गया। उस समय कोरोना संक्रमण का खौफ ऐसा था कि लोग आसपास से गुजरने से बचते थे, लेकिन चोरों ने तब भी बाथरूम से टोटी, शावर और पाइप चोरी कर लिए थे। इस मामले की जांच भी कराई गई थी और सुरक्षा का जिम्मा संभाल रही एजेंसी को नोटिस भी जारी हुआ था।
240 बेड के इस अस्पताल में हर जगह सुरक्षाकर्मी तैनात करना मुमकिन नहीं है। टोटियां-शावर व अन्य सामान चोरी होने का मामला सामने आने पर निगरानी बढ़ाई गई है। कई जगह से महंगी फिटिंग हटवाकर स्टोर में रखवा दी गई है। उसकी जगह प्लास्टिक की फिटिंग लगवाई गई है। -डॉ. राजेंद्र कुमार, सीएमएस-जिला अस्पताल