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सरकार बदली पर खौफ नहीं हुआ कम: दुजाना गिरोह की कुंडली खंगाल रही STF, गैंगस्टर बनाने में कुछ नेताओं का हाथ

Sat, 06 May 2023 08:35 PM IST
Vikas Kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, ग्रेटर नोएडा

सार

अनिल दुजाना के आपराधिक रिकॉर्ड भी उसके राजनीतिक संरक्षण की कहानी बयां करता है। अनिल दुजाना क्षेत्र में सबसे अधिक सक्रिय वर्ष 2011 व 2012 में रहा।
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अनिल दुजाना - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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अनिल दुजाना के एनकाउंटर के बाद गिरोह की कुंडली खंगाल रही एसटीएफ व पुलिस को कई चौकाने वाली जानकारियां मिली हैं। गाजियाबाद में वर्ष 2002 में पहली हत्या के बाद शार्प शूटर के नाम से पहचान बनाने वाले अनिल दुजाना के वेस्ट यूपी का बड़ा गैंगस्टर बनने में कुछ नेताओं का हाथ है। एसटीएफ और पुलिस को राजनीतिक संरक्षण देने वाले कई नाम मिले हैं। इस संबंध में खुफिया विभाग भी जानकारी जुटा रहा है। ऐसे में आशंका जताई जा रही है कि इन नेताओं के नाम शासन तक भेजकर इन पर भी शिकंजा कस सकता है।

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वर्ष 2002 में गाजियाबाद में बेखौफ होकर पहली हत्या हरवीर की की, इसके बाद बिसरख कोतवाली क्षेत्र में रोजा जलालपुर गांव के राजू की हत्या की। इसके बाद अनिल दुजाना चर्चाओं में आया। इसी वर्ष अनिल दुजाना ने गाजियाबाद के गैंगस्टर अमित कसाना से मिलकर न केवल रिठौरी गैंग से हाथ मिलाया। अमित कसाना वर्तमान में रिठौरी गैंग की कमान संभालने वाले रणदीप भाटी का भांजा है। 

अमित कसाना ने ही रणदीप के भाई रणपाल से अनिल दुजाना की मुलाकात कराई। उस दौरान रिठौरी गैंग की सुंदर भाटी गैंग से गैंगवार चल रही थी और सुंदर भाटी को राजनीति संरक्षण प्राप्त होने की अनिल दुजाना को जानकारी हुई। इसके चलते वह स्थानीयत नेताओं के सहारे बड़े नेताओं से मिला और उसने राजनीतिक संरक्षण प्राप्त कर लिया। इसके बाद अनिल दुजाना से पीछे मुड़कर नहीं देखा और एके बाद एक वारदात करता रहा और गिरोह को जिले से न केवल वेस्ट यूपी बल्कि दिल्ली एनसीआर तक फैला लिया।

सरकार बदली पर खौफ नहीं हुआ कम 
अनिल दुजाना के आपराधिक रिकॉर्ड भी उसके राजनीतिक संरक्षण की कहानी बयां करता है। अनिल दुजाना क्षेत्र में सबसे अधिक सक्रिय वर्ष 2011 व 2012 में रहा। आशंका ये भी है कि अनिल को राजनीतिक संरक्षण देने वाले दोनों पार्टी से जुड़े हो या फिर सरकार बदलने पर दल बदल गए हों। वर्ष 2011 में बसपा कार्यकाल का उस दौरान का अंतिम वर्ष था। 2012 में सपा शासनकाल शुरू हुआ। 

अनिल दुजाना गिरोह ने 12 मई 2011 को मुढ़ी बकापुर थाना बादलपुर निवासी विजय, 24 अगस्त 2011 को बादलपुर के आनन्द उर्फ नन्दू, 22 सितंबर 2011 को सरिया व स्क्रैप-सरिया के धंधे की प्रतिद्वंदिता में प्रधान जय चन्द की, 18 नवंबर 2011 को साहिबाबाद में एक शादी समारोह में सुंदर भाटी पर अनिल दुजाना, रणदीप भाटी एवं अमित कसाना आदि ने संगठित होकर स्वचालित हथियारों से हमला किया। हमले में सुन्दर भाटी गैंग के शौकीन, नवीन और जबर सिंह मारे गये थे। लेकिन सुंदर भाटी बच निकला। 

6 जनवरी 2012 को मुजफ्फरनगर में खेड़ा धर्मपुरा के सोनू उर्फ हरीश की हत्या की गई। ये हत्या खेड़ा धर्मपुरा के अनिल दुजाना गैंग के अमित शर्मा के कहने पर की गई। 8 जनवरी 2012 को इस गैंग ने छपार मुजफ्फरनगर के संजीव त्यागी की हत्या की। 29 जून 2012 को दादरी के अशोक की हत्या की गई।
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जेल में आने वाले लोगों के होटल में रुकने का था प्रबंध
केवल गौतमबुद्ध नगर ही नहीं जब अनिल दुजाना को बांदा व महाराजपुर की जेल में स्थानांतरित किया गया तो वहां भी गैंगस्टर का सिक्का राजनीतिक संरक्षण के कारण ही चलता था। अनिल दुजाना से गिरोह के गुर्गे व उसके करीबी वहां तक मिलने जाते थे तो उनके होटल में रुकने आदि का प्रबंध भी राजनीतिक संरक्षण देने वाले लोग करते थे और इसके बदले अपने काम अनिल दुजाना गिरोह से कराते थे। अनिल दुजाना गिरोह की कुंडली खंगाल रही एसटीएफ जेल में मिलाई करने आने वालों की भी कुंडली खंगाल रही है।
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