प्रदेश में फिल्म उद्योग को बढ़ावा देने के लिए यूपी सरकार ने फिल्म नीति-2023 को मंजूरी देते हुए शूटिंग करने पर दो करोड़ रुपये समेत कई रियायत देने की घोषणा की हैं। इसके बावजूद यमुना प्राधिकरण क्षेत्र में एक हजार एकड़ में बनने वाली फिल्म सिटी के लिए विकासकर्ता कंपनी आगे नहीं आ रही है। जबकि कंपनियों को बुलाने के लिए नियमों में काफी लचीलापन लाया जा चुका है। करीब एक साल से फिल्म सिटी की वैश्विक निविदा की तारीख कई बार बढ़ाई जा चुकी है। इस बार जारी निविदा की अंतिम तिथि 28 फरवरी है, लेकिन अभी तक दो कंपिनयों ने आवेदन किया है। जबकि टेंडर खोलने के लिए कम से कम तीन कंपनियों का शामिल होना अनिवार्य है।
यीडा के सेक्टर-21 में एक हजार एकड़ में फिल्म सिटी प्रस्तावित है। इसे तीन चरणों में विकसित किया जाना है। इसी साल पहले चरण का काम किया जाना प्रस्तावित है। यह योजना 10 हजार करोड़ रुपये की है। दो दिन पहले ही प्रदेश सरकार ने मुंबई की तर्ज पर यूपी को भी फिल्म सिटी के रूप में विकसित करने के लिए फिल्म नीति-2023 तक बना दी है। जिसके तहत प्रदेश में फिल्म की शूटिंग करने पर और यूपी के कलाकारों को किरदार देने पर दो करोड़ रुपये तक की छूट देने का प्रावधान किया गया है। इसमें फिल्म प्रशिक्षण संस्थान बनाने के लिए भी 50 लाख रुपये तक सब्सिडी देने की घोषणा की है। इसके अलावा भी कई तरह के लाभ दिए जाएंगे। मगर इन सबके बावजूद गौतमबुद्धनगर में बन रही फिल्म सिटी को विकसित करने के लिए कंपनियां आगे नहीं आ रही हैं। दो बार फिल्म सिटी के लिए वैश्विक निविदा निकाली जा चुकी है। पहली बार में एक कंपनी ने टेंडर डाला था और वह भी आधा-अधूरा था।
तीन चरणों में होगा फिल्म सिटी का विकास
तीन चरणों में विकसित की जाने वाली फिल्म सिटी मे 1000 एकड़ भूमि में से 740 एकड़ पर फिल्म फैसिलिटी, 40 एकड़ पर फिल्म संस्थान और 120 एकड़ पर एम्यूजमेंट पार्क विकसित होगा। रिटेल व अन्य वाणिज्यिक योजना जैसे होटल, रेस्तरां, विला और कार्यालय 100 एकड़ में विकसित किए जाने हैं। निविदा प्रपत्र भरने के लिए फिल्म सिटी की विकासकर्ता कंपनी की तकनीक और वित्तीय योग्यता भी तय गई है। ग्लोबल टेंडर के लिए आवेदन करने वाली कंपनी का का फिल्म और मीडिया क्षेत्र में पात्र परियोजनाओं पर निर्माण आदि का अनुभव होना चाहिए। इसमें दो श्रेणी हैं। पहली फिल्म और दूसरी ओटीटी प्लेटफार्म की श्रेणी है।
यह हुए बदलाव
- विकासकर्ता कंपनी का लाइसेंस 40 साल के बजाय 90 साल कर दिया गया है।
- अब फिल्म के अलावा एम्यूज़मेंट पार्क, ओटीटी प्लेटफॉर्म, ब्रॉडकास्टिंग, मीडिया एंटरटेनमेंट, फिल्म इंस्टीट्यूट आदि शामिल किए गए
- इस बार विकास कर्ता कंपनी को अपनी 75 फीसदी फिल्म एक कंपनी की टर्न ओवर और दूसरी कंपनी की 25 फीसदी टर्न ओवर को शामिल कर सकते हैं।
कैबिनेट बैठक में कंपनी के लिए प्रस्ताव कराया जाएगा पास
अधिकारियों का कहना है कि यदि बिड में कंपनियां आगे नहीं आएंगी तो केबिनेट में इसे ले जाकर एक ही बड़ी कंपनी को विकसित करने के लिए प्रस्ताव रखा जाएगा। इसके बाद संबंधित कंपनी फिल्म सिटी को विकसित कर सकेगी।