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Noida News: दस साल से सदमे में सपा नेता की पत्नी, नहीं दे पाई हत्या की गवाही

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दस साल से सदमे में सपा नेता की पत्नी, नहीं दे पाई हत्या की गवाही
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- आंखों के सामने हुई थी पति की हत्या, एक साल पहले भाई को मार डाला था
- बेटे की भी हत्या की धमकी दे गए थे बदमाश, दौरे पड़ने के कारण नहीं आई कोर्ट
माई सिटी रिपोर्टर
ग्रेटर नोएडा। 25 अप्रैल 2013 को डाबरा गांव में सपा के राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य चमन भाटी नहाने की तैयारी कर रहे थे, तभी स्कॉर्पियो में सवार होकर आए रिठौड़ी गैंग के रणदीप भाटी और उसके साथियों ने ताबड़तोड़ गोलियां बरसाकर हत्या कर दी। आरोपियों ने तब तक गोलियां चलाई जब तक चमन भाटी के सिर, सीने व शरीर छलनी नहीं हो गए। यह दृश्य चमन भाटी की पत्नी राजवती ने देखा और तभी से वह सदमे में हैं। इसके चलते चश्मदीद होने के बावजूद वह गवाही नहीं दे पाईं। इससे एक साल पहले राजवती के भाई पंकज नागर की भी हत्या की गई थी।
जिला सहायक शासकीय अधिवक्ता अपराध शिल्पी भदौरिया ने बताया कि 25 अप्रैल 2013 को डाबरा गांव में चमन भाटी की उसके ही घर में घुसकर ताबड़तोड़ 22 गोली मारकर हत्या की गई थी। इस मामले को दो अलग-अलग फाइल बनाकर सुना गया। एक फाइल में रणदीप भाटी और कुलदीप भाटी के केस की सुनवाई हुई। चमन के भाई कमल भाटी समेत 15 गवाहों ने बयान दर्ज कराए। दूसरी फाइल में योगेश डाबरा और उमेश पंडित के केस की सुनवाई हुई। इसमें आठ गवाहों ने बयान दर्ज कराए। राजवती केस में चश्मदीद थीं लेकिन वह इस स्थिति में नहीं थीं कि गवाही देने आ पाएंं। चमन भाटी के भाई और केस के गवाह कमल भाटी का कहना है कि राजवती को पति और भाई की हत्या के कारण सदमा लगा था और हत्यारों ने उनके बेटे की भी हत्या की धमकी दी थी। सदमे के कारण उन्हें दौरे भी पड़ते हैं। इसके कारण गवाही से राजवती का नाम वापस लिया गया था।
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दो परिवार के और शेष सरकारी गवाह
ग्रेटर नोएडा जोन के दादरी थाना प्रभारी सुजीत उपाध्याय ने कड़ी सुरक्षा में गवाहों के बयान दर्ज कराए। न्यायालय में बयान देने वाले गवाहों में पहली फाइल में कमल भाटी और उनके पिता केस के वादी फुंदन सिंह के अलावा शेष पुलिसकर्मी व डाक्टर ने बयान दिए। दूसरी फाइल में कमल भाटी और उनके भांजे संदीप भाटी के अलावा शेष सरकारी गवाहों ने बयान दर्ज कराए।
धमकी देने वाले यतेंद्र और हरेंद्र के बरी होने के बाद जताया खतरा
कमल भाटी ने बताया कि यतेंद्र और हरेंद्र, चमन भाटी की हत्या में बरी हुए हैं। लेकिन वह हमले व धमकी के केस में वांछित हैं। पीड़ित परिवार को इन आरोपियोें से जान का खतरा है। कमल का कहना है कि उसकी व रणदीप भाटी की ससुराल तिगांव के एक ही मोहल्ले में हैं। वहीं, कुलवीर भाटी और चमन भाटी की ससुराल चचूला गांव में है। इसके कारण पारिवारिक कार्यक्रमों में उनके परिवार का आना जाना है। इससे उन्हें डर बना रहता है। पीड़ित परिवार ने आरोपियों पर धमकी-हमले के केस में भी कार्रवाई की मांग की है।
गैंगस्टर रणदीप को कठघरे में लगा डर
गैंगस्टर रणदीप को दिल्ली तिहाड़ जेल से कड़ी सुरक्षा और बुलेट प्रूफ जैकेट में लाया गया। रणदीप की पत्नी कुछ महीने पर पेशी पर लाने के दौरान पति की जान को खतरा बताैर सुरक्षा की मांग कर चुकी है। लेकिन जज के सामने पेश करने के दौरान रणदीप की बुलेट प्रूफ जैकेट उतरवा ली गई। कठघरे में खड़े रणदीप ने वकील के करीब आते ही खतरा बताते हुए जैकेट मांगी, तब रणदीप को फिर से जैकेट पहनाई गई।
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जिले की पहली सरकारी वकील बनीं मिसाल
इस केस की पैरवी करने वाली शिल्पी भदौरिया जिले की पहली शासन के गठित पैनल की सरकारी वकील हैं। पहली महिला वकील ने वेस्ट यूपी के बड़े गैंगस्टर रणदीप भाटी और उसके साथियों को सजा दिलाकर एक मिसाल पेश की है।
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