आपके घर के नल पर जल्द ही प्राधिकरण नकेल लगाने जा रहा है। पहले चरण के तहत पांच हजार परिसरों में पानी के लिए स्मार्ट मीटर लगाने की योजना ने रफ्तार पकड़ ली है। अक्तूबर तक मीटर लगाने का काम पूरा हो जाएगा। दिसंबर से खपत के आधार पर पानी के बिल जारी होने लगेंगे। हालांकि, अभी पानी की दरें तय नहीं की गई हैं, लेकिन जल्द ही इसका फैसला होगा। योजना के तहत ग्रुप हाउसिंग सोसाइटी में 900 बल्क कनेक्शन लगाए जाएंगे, जबकि आवासीय और व्यावसायिक परिसरों 4100 मीटर लगेंगे।
सेक्टर-27 और 19 के 140 परिसरों में मीटर लगा दिए गए हैं। रूस और यूक्रेन वार के कारण स्मार्ट मीटर की आपूर्ति बाधित होने पर काम की रफ्तार मंद पड़ी, लेकिन अब बाधा दूर हो गई है और 25 अगस्त को मीटरों की खेप नोएडा पहुंच जाएगी। इसके बाद चार सेक्टरों के चार हजार से ज्यादा परिसरों में स्मार्ट मीटर लगाने का काम तेजी से किया जाएगा। अक्तूबर तक पहले चरण के तहत सभी पांच हजार परिसरों में मीटर लगा दिए जाएंगे। एक महीने तक ट्रायल किया जाएगा और दिसंबर से पानी की खपत के आधार पर बिल तैयार कर उपभोक्ताओं को भेजे जाएंगे। परियोजना पर प्राधिकरण करीब 10 करोड़ रुपये खर्च कर रहा है। बेंगलूरू की बीसीआईटीएस कंपनी को मीटर लगाने और दस साल तक रखरखाव की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
ग्रुप हाउसिंग सोसाइटी को मिलेंगे बल्क कनेक्शन
शहर की ग्रुप हाउसिंग सोसाइटी में अलग-अलग फ्लैटों में मीटर लगाने की जगह प्राधिकरण 40 एमएम के बल्क कनेक्शन जारी करेगा। सोसाइटी में पानी की खपत के आधार पर बिल भेजा जाएगा, जिसे बिल्डर या मेंटेनेंस एजेंसी निवासियों से सब मीटरों के जरिये वसूलेगी। वहीं, सेक्टरों में हर परिसर में प्राधिकरण मीटर लगाएगा।
नहीं आएगा मीटर रीडर, खपत पर रख सकेंगे नजर
परिसरों में लगाए जा रहे स्मार्ट मीटर ऑटोमेटिक होंगे। हर महीने रीडिंग लेने के लिए जल विभाग का कर्मचारी नहीं आएगा, बल्कि मीटर अपने आप ही महीने की रीडिंग सिस्टम को भेज देगा। इसके आधार पर बिल बनाकर निवासियों को ऑनलाइन भेजे जाएंगे। इसका भुगतान भी ऑनलाइन ही किया जा सकेगा। स्मार्ट मीटर लगने के बाद कनेक्शन से छेड़छाड़ करना आसान नहीं होगा।
दिल्ली, गुरुग्राम और हैदराबाद मॉडल पर मंथन
दिल्ली, गुरुग्राम और हैदराबाद की दरों से तुलना की जा रही है। उम्मीद है कि दिल्ली से कम या समान दरों पर नोएडा के लोगों को पानी उपलब्ध कराया जाएगा। फिलहाल, शहरवासियों को भूखंडों के क्षेत्रफल के हिसाब से जल-सीवर शुल्क चुकाना पड़ता है। पहले चरण के ट्रायल के बाद पूरे शहर में इस व्यवस्था को लागू किया जाएगा।