ग्रेटर नोएडा। ‘अगर मैं जीत सका, तुम भी जीत सकते हो’ यह सिर्फ़ एक आत्मकथा नहीं, बल्कि हर उस इंसान की कहानी है, जिसने कठिन परिस्थितियों से टकराते हुए भी हार मानने से इंकार कर दिया। यह बातें लेखक सीए अमित सेनगुप्ता ने संघर्षों का हस्ताक्षर के विमोचन में कहीं। उन्होंने कहा कि आज की तेज रफ़्तार ज़िन्दगी में बच्चों को असली जीवन की कहानियां सुनाने का समय कम मिलता है। संघर्षों का हस्ताक्षर किताब वही काम करेगी। आर्मी इंस्टीट्यूट ऑफ इन्फॉर्मेशन एंड टेक्नोलॉजी के कुलसचिव कर्नल डीके त्यागी ने बताया कि यह पुस्तक केवल एक आत्मकथा नहीं, बल्कि हर विद्यार्थी और युवा के लिए प्रेरणा का स्रोत है। ब्यूरो