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नोएडा प्राधिकरण को झटका : ऐस बिल्डर को मिलेगी जीरो पीरियड की सुविधा

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ऐस बिल्डर को मिलेगी जीरो पीरियड की सुविधा
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हाईकोर्ट ने नक्शे पास कराने पर रोक भी हटाई, नोएडा प्राधिकरण को झटका
स्पोर्ट्स सिटी मामले में नोएडा प्राधिकरण ने लगाई थीं कई प्रकार की पाबंदियां


माई सिटी रिपोर्टर
नोएडा। सेक्टर-150 के भूखंड संख्या एससी-02 स्पोर्ट्स सिटी के मामले में नोएडा प्राधिकरण को बड़ा झटका मिला है। हाईकोर्ट ने ऐस इंफ्रासिटी डेवलपर्स प्राइवेट लिमिटेड बिल्डर की याचिका पर सुनवाई करते हुए प्राधिकरण को भूखंड आवंटन के दिन से लेकर वर्तमान समय तक जीरो पीरियड देने के साथ-साथ नक्शा पास कराने पर लगाई गई रोक हटा ली है। कोर्ट ने प्राधिकरण से बची हुई जमीन पर कब्जा दिलाने का आदेश दिया है।

बिल्डर कंपनी का आरोप है कि प्राधिकरण ने आवंटित की गई पूरी जमीन भी नहीं दिलाई और अधूरी जमीन पर अपना पैसा मांग रहा है। यही नहीं, प्राधिकरण ने काफी ज्यादा ब्याज भी लगाया है। बिल्डर कंपनी ने जब नक्शा पास कराना चाहा तो पाबंदियों की बात कहते हुए नक्शा पास नहीं किया गया। इस वजह से बिल्डर को काफी नुकसान झेलना पड़ा।
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ऐस बिल्डर उस कंसोर्टियम का सदस्य है, जिसे 12 लाख वर्गमीटर जमीन आवंटित की गई थी, लेकिन मौके पर केवल तीन लाख वर्गमीटर जमीन पर ही कब्जा दिया गया। इसमें ऐस बिल्डर की परियोजना के लिए 60 हजार वर्गमीटर जमीन देनी थी। इसे मेसर्स क्रेस्ट प्रमोटर्स प्राइवेट लिमिटेड के पक्ष में लीड डीड किया गया था, लेकिन पूरी जमीन पर अब तक कब्जा नहीं दिलाया गया।

बाद में बिल्डर कंपनी ने प्राधिकरण में संशोधित भवन परियोजना के लिए नक्शे पास कराना चाहा तो प्राधिकरण ने 201वीं बोर्ड बैठक के माध्यम से बिल्डर परियोजना को किसी तरह का लाभ देने से इन्कार कर दिया। प्राधिकरण ने बिल्डर को बकाया चुकाने के बाबत दबाव बनाता रहा। यही नहीं, प्राधिकरण ने बिल्डर के भूखंड आवंटन को निरस्त करने तक का नोटिस भेजा।
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हाईकोर्ट ने यह दिया आदेश
इलाहाबाद हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश प्रीतिंकर दिवाकर और न्यायमूर्ति आशुतोष श्रीवास्तव की पीठ ने आदेश में कहा कि याचिकाकर्ता की संशोधित भवन योजनाओं को मंजूरी दी जानी चाहिए। अतिरिक्त पैसे की मांग गलत है। नोएडा प्राधिकरण की 201वीं बोर्ड बैठक में लगाए प्रतिबंध गलत हैं। याचिकाकर्ता कंपनी को पूरे क्षेत्र पर कब्जा नहीं मिला, इस वजह से वह काम नहीं कर पाई। अलग-अलग आंदोलनों और किसानों ने मौके पर काम नहीं करने दिया गया। ऐसे में याचिकाकर्ता भूमि आवंटन की तिथि से अब तक शून्य अवधि का लाभ लेने का हकदार है। यही नहीं, प्राधिकरण की अतिरिक्त मुआवजे की मांग खारिज की जाती है। इसके अलावा लीज प्रीमियम की किस्त और वार्षिक लीज किराये की मांग भी खारिज की जाती है।

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फैक्ट फाइल
- प्राधिकरण ने 2014-15 में सेक्टर-150 में स्पोर्ट्स सिटी परियोजना लांच की
- कंपनियों के कंसोर्टियम को 12 लाख वर्गमीटर जमीन आवंटित की गई
- इसमें ऐस बिल्डर का 60 हजार वर्गमीटर जमीन था
- कंसोर्टियम को आवंटित जमीन में से केवल तीन लाख वर्गमीटर जमीन पर कब्जा दिया गया
- ऐस बिल्डर को भी जमीन पर कब्जा नहीं मिला
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