फर्जी कंपनियों पर शिकंजा, रडार पर 11,736 कारोबारी
- बिजनेस इंटेलिजेंस एंड फ्रॉड एनालिटिक्स से सूची जारी, हाई रिस्क श्रेणी में 542 कारोबारी
- बोगस बिलों के जरिये करोड़ों की हेरफेर के संकेत मिलने पर राज्य जीएसटी विभाग अलर्ट
नंबर गेम
- 30 कंपनियों पर अब तक कसा शिकंजा
- 29.6 करोड़ की वसूली कर चुका विभाग
योगेश शर्मा
नोएडा। फर्जी कंपनियां बनाकर बोगस बिलों के जरिये करोड़ों रुपये की टैक्स चोरी के संकेत राज्य कर विभाग को मिले हैं। बिजनेस इंटेलिजेंस एंड फ्रॉड एनालिटिक्स (बीफा) सॉफ्टवेयर से ऐसे 11,736 करोबारी रडार पर आए हैं, जिन्होंने बोगस बिलों के जरिये कागजों में करोड़ों रुपये की ट्रांजेक्शन कर डाली। इनमें 542 करोबारी हाई रिस्क श्रेणी में डाले गए हैं। वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) में करोड़ों की हेरफेर के संकेत मिलने के बार विभाग की विशेष अनुसंधान शाखा अलर्ट हो गई है।
बोगस बिलों, फर्जी प्रपत्रों के आधार पर जीएसटी पंजीयन के जरिये इनपुट टैक्स क्रेडिट (आईटीसी) का लाभ लेने वाली सबसे ज्यादा फर्म रेडिमेड गारमेंट कारोबार से जुड़ी हैं। ऐसे 5523 डीलरों की जानकारी विभाग को मिली हैं, इनमें 126 हाई रिस्क श्रेणी में डाले गए हैं। नोएडा रेडिमेड गारमेंट उद्योग का हब माना जाता है। इसके अलावा 3059 मशीनरी, इलेक्ट्रिकल और इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पाद बनाने वाली कंपनियों की जानकारी मिली है, इनमें 126 हाई रिस्क श्रेणी में डाली गई हैं। रियल एस्टेट और निर्माण उद्योग से जुड़ी 1753 फर्मों में टैक्स की हेरफेर के संकेत बजनेस इंटेलिजेंस एंड फ्रॉड एनालिटिक्स सॉफ्टवेयर ने दिए हैं। इनमें भी 110 फर्म हाई रिस्क श्रेणी की हैं। होटल एंड रेस्तरां के अलावा ट्रांसपोर्ट से जुड़ी 1267 फर्म की जानकारी विभाग के हाथ लगी है। आईटी और टेलीकॉम सेक्टर में भी फर्जीवाड़े के जाल फैल रहा है। इससे जुड़ी 134 फर्म की जानकारी जुटाई गई है। इनमें सात फर्म हाई रिस्क श्रेणी में डाली गई हैं। इस पूरे फर्जीवाड़े के तार गौतमबुद्धनगर सहित नजदीकी जिलों के कारोबारियों से जुडऩे के संकेत भी मिले हैं। विभाग के विभाग की विशेष अनुसंधान शाखा के संयुक्त आयुक्त योगेश विजय ने बताया कि उनकी टीम लगातार कार्रवाई कर रही हैं।
नोएडा और गाजियाबाद पर टिकी निगाहें
पिछले चार साल में इस तरह के कई मामले सामने आए हैं, जिनमें फर्जी कंपनियां बनाकर सिर्फ कागजों में कारोबार दिखाया गया। बोगस बिलों के जरिये इनपुट टैक्स क्रेडिट (आईटीसी) का लाभ लेकर सरकारी राजस्व को नुकसान पहुंचाया गया। विभाग की टीमें अब तक 30 कंपनियों पर शिकंजा कस चुकी हैं, जिनसे 29.6 करोड़ की वसूली की जा चुकी है।
चार साल पहले पकड़ी थी सबसे बड़ी चोरी
मार्च 2019 में सेंट्रल जीएसटी की टीम ने बोगस बिलों के जरिये 238 करोड़ की धोखाधड़ी का खुलासा किया था। इससमें दिल्ली में रहने वाले दो भाईयों ने कई जगह अपने व रिश्तेदारों के नाम से करीब 70 फर्जी कंपनियों का पंजीयन कराकर देश के अलग-अलग राज्यों मेंं स्थित फर्मों से सिर्फ कागजों में कारोबार कर डाला था।
ऐसे काम करता है बीफा सॉफ्टवेयर
बीफा सॉफ्टवेयर में जैसे ही कोई जीएसटी नंबर डाला जाता है उसकी डिटेल आ जाती है। उसने कहां से माल खरीदा, किसे बेचा, उसके बाद माल खरीदने वाले ने किसे बेचा, अंत में माल पहुंचने तक की पूरी चेन की जानकारी मिल जाती है। अब तक यह काम अधिकारी कागजों के आधार पर करते थे, इसलिए चोरी पकड़ पाना मुश्किल होता था।
बीते साल बड़ी कार्रवाई
-01 अप्रैल : सेक्टर-62 में एक ही इमारत में चल रही तीन अलग फर्म फर्जी तरीके से आपस में ट्रेडिंग कर करोड़ों रुपये की कर चोरी में संलिप्त पाई गईं। 3.72 करोड़ रुपए की कर चोरी का खुलासा हुआ।
-22 अप्रैल : गौतमबुद्ध नगर और गाजियाबाद में 43 जगह छापे मारकर 128 करोड़ रुपये की कर चोरी का खुलासा। लोहा कारोबार के नाम पर बोगस बिल और फर्जी कंपनियों के जरिये कर चोरी।
- 01 अगस्त : सेक्टर-80 स्थित एक बीपीओ कंपनी में छापा मारकर 89 लाख रुपये की कर चोरी पकड़ी।
बोगस बिलों के जरिये 73 करोड़ की कर चोरी का खुलासा
- 30 सितंबर : नोएडा, ग्रेटर नोएडा और गाजियाबाद की 11 लोकेशन पर छापे मारे। 20 ऐसी फर्जी फर्मों की जानकारी सामने आई है जिनके माध्यम से बोगस बिलों के आधार पर 73.46 करोड़ रुपये कर चोरी हुई।