ड्रॉ लिस्ट में नाम आने के बाद भी निजी स्कूलों में शिक्षा के अधिकार अधिनियम (आरटीई) के तहत अधिकतर आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को बच्चों का दाखिला कराने के लिए कड़ी मशक्कत करनी पड़ती है। अब और कसरत करनी पड़ेगी, क्योंकि नए सत्र से जिले में आरटीई की 4,513 सीटें कम हो जाएंगी, जबकि इस साल 70 निजी स्कूलों को मान्यता मिली है।
निजी स्कूलों में सीटों की मैपिंग हो गई। विभाग का दावा है कि यू डाइस पोर्टल पर अंकित सीटों को ही आरटीई के पोर्टल पर चढ़ाया गया है। पिछले सत्र में भी यू डाइस पोर्टल से भी सीटों को अपडेट किया गया था। सत्र 2024-25 में करीब 1,095 स्कूलों 16516 सीटें आरटीई के तहत आरक्षित थीं। दिसंबर में शुरु होने वाले नए सत्र 2025-26 में 1165 स्कूलों में 12,003 सीटें होंगी। यह अब तक की सबसे कम सीटें होंगी।
2500 सीटें रह जाती हैं खाली
जिले के निजी स्कूलों में हर साल करीब ढाई हजार आरटीई सीटें खाली रह जाती हैं। इसकी वजह अधिकारियों की उदासीनता, स्कूलों की मनमानी और अभिभावकों की लापरवाही हैं।
बिसरख में सबसे अधिक सीटें
बिसरख ब्लॉक में सबसे अधिक 7635 सीटों आरटीई सीटें हैं। दनकौर में 1806, दादरी में 1588 और जेवर में 974 सीटें हैं। आरटीई के तहत निजी स्कूलों को 25 प्रतिशत सीटों पर दाखिला लेने का नियम है।
आरटीई में प्रवेश की स्थिति
| सत्र |
कुल सीट |
| 2020-21 |
15,000 |
| 2021-22 |
16,000 |
| 2022-23 |
18,029 |
| 2023-24 |
15,900 |
| 2024-25 |
16,516 |
| 2025-26 |
12,003 |
(नए सत्र के लिए मैपिंग के बाद स्थिति)
जिले में करीब 500 छोटे स्कूलों ने सीटें बढ़ा रखी थीं, जिससे उन्हें अधिक दाखिले मिल सके और शासन से मिलने वाली फीस वह ले सकें। अब यू डाइस पोर्टल से सभी स्कूलों की सीट अपलोड की गई है। जिस कारण सीटें कम हुई हैं।-
राहुल पंवार, बेसिक शिक्षा अधिकारी
अभिभावकों ने सवाल उठाए
निजी स्कूलों में आरटीई की सीटें कम होने पर अभिभावकों ने सवाल खड़े किए हैं। बिसरख ब्लॉक में रहने वाले अभिभावक रामनरेश ने बताया कि हर साल जनपद में सीटें कम ही होती जा रही हैं। इससे हजारों छात्र योजना से वंचित रह जाते हैं। एनसीआर पैरेंट्स एसोसिएशन के संस्थापक सुखपाल सिंह तूर का कहना है कि सीटें कम होने का मतलब मैपिंग सही से नहीं की गई है। जब जिले में निजी स्कूल बढ़ रहे हैं तो सीटें कम हो सकती हैं। अधिकतर स्कूलों में प्री प्राइमरी और कक्षा एक में दो से तीन सेक्शन चल रहे हैं। तो सीटें कम होने का सवाल ही नहीं खड़ा होता है।
मैपिंग बेसिक शिक्षा विभाग के अधिकारियों का कहना है कि मैपिंग यू डाइस पोर्टल से ही की गई है। इस बार एंट्री कक्षाओं की सीटों की मैपिंग की गई है। उन्होंने बताया कि उदाहरण के तौर पर यदि किसी स्कूल में प्री प्राइमरी से पढ़ाई होती है, तो वहां कक्षा एक की सीटें आरटीई पोर्टल पर नहीं दिखाई गई हैं। वहां प्री प्राइमरी कक्षाओं में ही आरटीई के तहत दाखिला मिलेगा। यदि कहीं कक्षा एक से पढ़ाई होती है तो वहां कक्षा एक में ही आरटीई के तहत सीटें आवंटित होंगी। इस कारण सीटें कम हुई हैं।