अरुणाचल प्रदेश के तीन युवकों ने सलारपुर गांव में नस्लीय टिप्पणी कर लाठी-डंडों से पिटाई का आरोप लगाया है। इस मामले में पूर्वोत्तर राज्यों के संगठनों ने केंद्रीय गृह मंत्रालय को पत्र भेजकर नाराजगी जताई है। हालांकि, पुलिस नस्लीय हमले से इंकार कर केवल मारपीट की घटना बता रही है।
अरुणाचल प्रदेश के चांगलांग जिले निवासी ज्ञान रंजन चकमा सलारपुर में रहकर शहर के एक मॉल के रेस्तरां में काम करता है। ज्ञान और उसके दो दोस्त 13 अगस्त की शाम सलारपुर गांव के बाजार में थे। ज्ञान का आरोप है कि इस दौरान नशे में धुत्त 7-8 युवक ने नस्लीय टिप्पणी करते हुए मजाक उड़ाया और मारपीट की।
जब तीनों दोस्त किराये के घर में पहुंचे तो युवक पीछे आ गए और घर में भी घुसकर लाठी-डंडों से पीट दिया। इससे पहले भी इसी तरह की घटनाएं गांव में पूर्वोत्तर के कई लोगों के साथ हो चुकी है। घटना के बाद ज्ञान को अपना किराये का घर खाली करना पड़ा। चकमा समुदाय के सात सौ से अधिक लोग भंगेल, गेझा व सलारपुर गांव में रहते हैं।
वहीं, नोएडा जोन के अपर पुलिस उपायुक्त आशुतोष द्विवेदी का कहना है कि इस मामले में शिकायत पर तुरंत कार्रवाई की गई थी। आरोपियों को गिरफ्तार किया गया था। मामले की जांच में नस्लीय हमले की बात सामने नहीं आई है और सामान्य मारपीट हुई थी।
मंगलवार को भी पीड़ित पक्ष से मिलने पुलिस गई थी और हर मदद का आश्वासन दिया था। हालांकि, सुबह के वक्त चकमा समुदाय के बहुत सारे लोग काम पर गए हुए थे। इधर, चकमा वेलफेयर एंड कल्चरल सोसाइटी, नोएडा (सीडब्ल्यूसीएसएन), अरुणाचल प्रदेश चकमा स्टूडेंट्स यूनियन (एपीसीएसयू) आदि ने मामले में केंद्रीय गृह मंत्रालय को पत्र लिखकर नस्लीय हमले की निंदा की है।