एनजीटी के आदेश पर जांच में ग्रेनो वेस्ट और ग्रेनो के 63 में से 41 प्रोजेक्ट पर मिला भूजल दोहन
सीपीसीबी और समिति ने लगाया 38 बिल्डर पर करीब 300 करोड़ का जुर्माना पर अभी तय नहीं कार्रवाई
माई सिटी रिपोर्टर
ग्रेटर नोएडा। ग्रेनो वेस्ट और ग्रेटर नोएडा के 38 प्रोजेक्टों में भूजल दोहन मिला, लेकिन अब तक दोषियों को सजा नहीं मिली है। करीब दो साल बीत जाने के बाद भी सजा नहीं मिलने से अन्य बिल्डरों के हौंसले भी बुलंद है। वो भी भूजल दोहन कर रहे हैं। हालांकि, एनजीटी में केस विचाराधीन है, लेकिन प्रशासन व प्राधिकरण को जुर्माने की रिपोर्ट दाखिल करनी है। वहीं, इन सबसे निराश याचिकाकर्ता का कहना है कि प्राधिकरण और प्रशासन की लापरवाही से बिल्डर बच रहे हैं। प्राधिकरण व प्रशासन को अपनी जिम्मेदारी निभानी होगी।
ग्रेनो वेस्ट और ग्रेटर नोएडा के 63 प्रोजेक्टों पर बोरवेल से भूजल दोहन का आरोप लगा था। स्थानीय निवासी प्रदीप डाहलिया और प्रसून पंत ने भूजल दोहन की शिकायत एनजीटी में की। एनजीटी के आदेश पर जिलास्तरीय समिति ने दो अलग-अलग चरण में जांच की। जांच में कुल 41 प्रोजेक्टों पर बोरवेल मिले। इनमें से तीन प्रोजेक्ट के पास भूजल का प्रयोग करने की एनओसी थी, लेकिन बाकी सभी अवैध रूप से भूजल दोहन कर रहे थे। एनजीटी ने बोरवेल को बंद करने के साथ-साथ प्रोजेक्ट की कुल कीमत का 0.5 प्रतिशत शुल्क जुर्माना लगाने का आदेश दिया। इस आदेश के बाद अक्तूबर, 2022 में जिलास्तरीय समिति ने 76.56 करोड़ का जुर्माना लगाया।
जुर्माने की धनराशि को जमा करने का भी आदेश दिया गया, लेकिन किसी भी बिल्डर ने जुर्माना जमा नहीं कराया। वहीं, सीपीसीबी ने 38 बिल्डरों पर 230 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाने की संस्तुति की थी, लेकिन अब तक बिल्डरों पर जुर्माना नहीं लग सका है। बिल्डरों ने अपना पक्ष रखा है। जिस पर एनजीटी ने जिलास्तरीय समिति से रिपोर्ट मांगी है। समिति को बैठक कर जुर्माने पर अपनी रिपोर्ट देनी हैं। इस सब में दो साल बीत चुके है। ऐसे में याचिकाकर्ता निराश है। उनका कहना है कि अगर भूजल दोहन को रोकने में इतना समय लगेगा तो फिर भूजल को बचाना मुश्किल होगा। इस मामले में कार्रवाई होने के बाद अन्य बिल्डरों के खिलाफ शिकायत की जानी थी, लेकिन जब तक कार्रवाई होगी, तब तक बिल्डर प्रोजेक्ट को पूरा कर जा चुके होंगे।
दो साल बीत चुके है, लेकिन अब तक भूजल दोहन करने वाले बिल्डरों को सजा नहीं मिल सकी है। अभी भी काफी प्रोजेक्ट में भूजल दोहन हो रहा हैं। इसके लिए प्राधिकरण और प्रशासन जिम्मेदार है। जुर्माना लगाने में देरी हो रही है। कार्रवाई में देरी से अन्य बिल्डरों के भी हौंसले बुदंल हैं। -
प्रदीप डाहलिया, याचिकाकर्ता
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मामला एनजीटी में विचाराधीन है। बिल्डरों के प्रोजेक्ट के बारे में प्राधिकरण को जानकारी देनी है। जिस पर समिति की बैठक में रखा जाएगा और जल्द ही बिल्डरों पर जुर्माना तय कर एनजीटी में रिपोर्ट दाखिल की जाएगी। -
देव कुमार गुप्ता, क्षेत्रीयाधिकारी, यूपीपीसीबी ग्रेटर नोएडा