दस साल से लंबित परियोजनाओं को नहीं मिली दिशा
-बोड़ाकी जंक्शन पर एक्सप्रेस गाड़ी के ठहराव की गई मांग, निवासियों ने सोशल मीडिया पर पर चलाया अभियान
संवाद न्यूज एजेंसी
ग्रेटर नोएडा। शहर में परिवहन के पर्याप्त साधन मुहैया नहीं होने के कारण निवासियों को परेशानियों का सामना करना पड़ा रहा है। शहर के चंद सेक्टरों को छोड़ दिया जाए तो अधिकतर में सार्वजनिक परिवहन के साधन नहीं है। चंद किमी पर रेलवे स्टेशन होने के बावजूद अभी भी लोगों को दिल्ली और गाजियाबाद जाना पड़ रहा है। इसे लेकर फेडरेशन ऑफ आरडब्ल्यूए पदाधिकारियों ने रविवार को एक्स (ट्वीटर) पर अभियान छेड़ा।
दरअसल, नोएडा-ग्रेटर नोएडा और अब यमुना प्राधिकरण में भी लोग बसने लगे हैं, लेकिन उनको न तो रोडवेज निगम की ओर से कोई सेक्टरों के बाहर की सुविधा मिली है। इसके अलावा रेलवे लाइन और रेलवे स्टेशन भी बोड़ाकी में चंद किमी पर है और न ही एक्सप्रेस गाड़ियों का ठहराव किया गया है। जबकि लगातार करीब 10 साल से निवासी इसकी मांग कर रहे हैं। जबकि यहां से लोगों को लखनऊ, मुंबई, कलकत्ता समेत, बिहार, मध्य प्रदेश, गुजरात समेत अन्य राज्यों में जाने के लिए दिल्ली से बस व ट्रेनें पकड़नी पड़ती है। जबकि शहर में बोड़ाकी जंक्शन व अंतरराज्यीय बस अड्डा परियोजनाएं पिछले दस साल से प्रस्तावित है।
फेडरेशन ऑफ आरडब्ल्यूए के महासचिव दीपक कुमार का कहना है कि लगभग 8 लाख की आबादी वाले शहर में निवासियों के दूर-दराज आवागमन के लिए संसाधनों का अभाव है। जेवर के हवाई अड्डे से पहले बोड़ाकी जंक्शन का प्रस्ताव पारित है, लेकिन कोई सुनवाई नहीं की गई है।