कोरोना की दूसरी लहर में आपदा को अवसर बनाने वाले कुछ निजी अस्पताल अब डेंगू की आड़ में बड़ा खेल कर रहे हैं। निजी अस्पतालों में भर्ती डेंगू मरीजों की संख्या 100 के पार पहुंच गई है, जबकि जिले का स्वास्थ्य महकमा अब तक केवल दो मरीजों की पुष्टि कर रहा है। साधारण वायरल से कम हो रही प्लेटलेट्स को डेंगू मानकर मरीज-तीमारदारों की जेब ढीली की जा रही है।
सेक्टर-30 स्थित जिला अस्पताल की अधिकृत केंद्रीय लैब में डेंगू मरीजों के नमूने एलाइजा जांच के लिए भेजना अनिवार्य है, लेकिन कोई भी अस्पताल मरीजों के नमूने केंद्रीय लैब में नहीं भेज रहा है। एनएस-1 एंटीजन जांच के आधार पर डेंगू संभावित मानकर मरीजों का उपचार किया जा रहा है। हालांकि, विभाग इन मरीजों को डेंगू के रोगी मानने को तैयार नहीं है। जिला अस्पताल के सीएमएस डॉ. पवन कुमार अरुण ने बताया कि जिला अस्पताल में डेंगू वार्ड बनकर तैयार है, लेकिन अब तक डेंगू का एक भी मरीज नहीं आया है। केंद्रीय लैब को निजी अस्पतालों की तरफ से अब तक कोई सैंपल नहीं भेजा गया है।
हर बुखार डेंगू नहीं
फेलिक्स अस्पताल के चेयरमैन डॉ. डीके गुप्ता ने बताया कि हर बुखार को डेंगू मानकर घबराने की जरूरत नहीं है। वायरल और डेंगू बुखार में फर्क करना आसान है। वायरल में मरीज को बुखार के साथ नाक बहना, गले में दर्द, शरीर में दर्द, कमजोरी जैसे लक्षण दिखते हैं। वहीं, डेंगू में बुखार तेज होता है। मांसपेशियों और हड्डियों में बेहद दर्द और बुखार के 24 या 48 घंटों बाद पूरे शरीर में गुलाबी रंग के चकते हो जाते हैं, चूंकि हर बुखार डेंगू नहीं होता है। ऐसे में बुखार आए तो परेशान होने की जरूरत नहीं है। लक्षण के आधार पर जांच करानी चाहिए।
उलझा रहे एक जैसे लक्षण
बारिश के कारण वायरल के मामले बढ़ रहे हैं। एडिज मच्छरों के प्रजनन के लिहाज से यह मौसम अनुकूल है। डेंगू, मलेरिया और कोविड-19 के एक जैसे लक्षण होने से मरीज परेशान हैं, लेकिन एहतियात और समय पर जांच-उपचार कराकर समस्या को दूर किया जा सकता है। तेज बुखार, सिरदर्द, दाने और जोड़ों आदि में दर्द की शिकायत मरीज सबसे ज्यादा बता रहे हैं।