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Noida News: राजनीतिक संरक्षण ने शूटर को बनाया गैंगस्टर, नेता भी रडार पर

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राजनीतिक संरक्षण ने शूटर को बनाया गैंगस्टर, नेता भी रडार पर
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- अनिल दुजाना गिरोह की कुंडली खंगालने में जुटी एसटीएस को मिले कई नेताओं के नाम
- खुफिया विभाग ने जुटाई जानकारी, अंतिम संस्कार में जिला स्तर तक के नेता हुए शामिल
जेपी शर्मा
ग्रेटर नोएडा। अनिल दुजाना के एनकाउंटर के बाद गिरोह की कुंडली खंगाल रही एसटीएफ और पुलिस को कई चाैंकाने वाली जानकारी मिली है। गाजियाबाद में वर्ष 2002 में पहली हत्या के बाद शार्प शूटर के नाम से पहचान बनाने वाले अनिल दुजाना के वेस्ट यूपी का बड़ा गैंगस्टर बनने में कुछ नेताओं का हाथ बताया जा रहा है। एसटीएफ और पुलिस को राजनीतिक संरक्षण देने वाले कई नाम मिले हैं। खुफिया विभाग भी इसकी जानकारी जुटा रहा है। आशंका जताई जा रही है कि इन नेताओं के नाम शासन तक भेजकर इन पर भी शिकंजा कसा जा सकता है।
अनिल दुजाना ने वर्ष 2002 में गाजियाबाद में पहली हत्या हरवीर की थी। इसके बाद बिसरख कोतवाली क्षेत्र में रोजा जलालपुर गांव के राजू की हत्या की। इसके बाद अनिल दुजाना चर्चाओं में आया। इसी वर्ष अनिल दुजाना ने गाजियाबाद के गैंगस्टर अमित कसाना संग मिलकर रिठौरी गैंग से हाथ मिलाया। अमित कसाना वर्तमान में रिठौरी गैंग की कमान संभालने वाले रणदीप भाटी का भांजा है। अमित कसाना ने ही रणदीप के भाई रणपाल से दुजाना की मुलाकात कराई। उस दौरान रिठौरी गैंग की सुंदर भाटी गैंग से गैंगवार चल रही थी। सुंदर भाटी को राजनीति संरक्षण प्राप्त होने की अनिल दुजाना को जानकारी हुई। इसके चलते वह स्थानीय नेताओं के सहारे बड़े नेताओं से मिला और उसने राजनीतिक संरक्षण प्राप्त कर लिया। इसके बाद अनिल दुजाना से पीछे मुड़कर नहीं देखा और एके बाद एक वारदात करता रहा और गिरोह को जिले से न केवल वेस्ट यूपी बल्कि दिल्ली एनसीआर तक फैला लिया।
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सरकार बदली नहीं कम हुआ खौफ
अनिल दुजाना के आपराधिक रिकार्ड भी उसके राजनीतिक संरक्षण की कहानी बयान करता है। दुजाना क्षेत्र में सबसे अधिक सक्रिय वर्ष 2011 और 2012 में रहा। आशंका ये भी है कि अनिल को राजनीतिक संरक्षण देने वाले दोनों पार्टी से जुड़े हो या फिर सरकार बदलने पर दल बदल गए हों। वर्ष 2011 में बसपा कार्यकाल का उस दौरान का अंतिम वर्ष था। 2012 में सपा शासनकाल शुरू हुआ। दुजाना गिरोह ने 12 मई 2011 को मुढ़ी बकापुर थाना बादलपुर निवासी विजय, 24 अगस्त 2011 को बादलपुर के आनन्द उर्फ नन्दू, 22 सितंबर 2011 को सरिया व स्क्रैप-सरिया के धंधे की प्रतिद्वंदिता में प्रधान जयचंद की हत्या की। वहीं 18 नवंबर 2011 को साहिबाबाद में एक शादी समारोह में सुंदर भाटी पर स्वचालित हथियारों से लैस होकर हमला किया। हमले में सुंदर भाटी गैंग के शौकीन, नवीन और जबर सिंह मारे गए थे। लेकिन सुंदर भाटी बच निकला। वहीं 6 जनवरी 2012 को मुजफ्फरनगर में खेड़ा धर्मपुरा के सोनू उर्फ हरीश की हत्या की गई। हत्या खेड़ा धर्मपुरा के अनिल दुजाना गैंग के अमित शर्मा के कहने पर की गई। वहीं 8 जनवरी 2012 को इस गैंग ने छपार मुजफ्फरनगर के संजीव त्यागी और 29 जून 2012 को दादरी के अशोक की हत्या की थी।
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जेल में आने वाले लोगों के होटल में रुकने का था प्रबंध
केवल गौतमबुद्ध नगर ही नहीं जब अनिल दुजाना को बांदा व महाराजपुर की जेल में स्थानांतरित किया गया तो वहां भी गैंगस्टर का सिक्का राजनीतिक संरक्षण के कारण ही चलता था। अनिल दुजाना से गिरोह के गुर्गे व उसके करीबी वहां तक मिलने जाते थे तो उनके होटल में रुकने आदि का प्रबंध भी राजनीतिक संरक्षण देने वाले लोग करते थे और इसके बदले अपने काम गिरोह से कराते थे।
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