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Noida News: यमुना नदी में भी लगेंगे हरियाणा-यूपी सीमा के पिलर

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यमुना नदी में भी लगेंगे हरियाणा-यूपी सीमा के पिलर

-चंडीगढ़ हाईकोर्ट के आदेश पर यूपी-हरियाणा के बीच सीमांकन का काम शुरू

-गौतमबुद्ध नगर समेत सहारनपुर से लेकर अलीगढ़ तक लगेंगे 1300 से अधिक पिलर
माई सिटी रिपोर्टर
ग्रेटर नोएडा। गौतम बुद्ध नगर में एक बार फिर उत्तर प्रदेश और हरियाणा के बीच सीमांकन का काम शुरू हो गया है। चंडीगढ़ हाईकोर्ट के आदेश पर सर्वे ऑफ इंडिया की टीम पिलर लगा रही है। सोमवार को नोएडा के चक बसंतपुर गांव के डूब एरिया में पिलर लगाने के बिंदुओं को चिह्नित किया गया। वहीं, इस बार अगर यूपी-हरियाणा की सीमा रेखा यमुना नदी के बीच में होगी तो वहां भी पिलर लगाया जाएगा। इस काम में एनडीआरएफ टीम की मदद ली जाएगी।

हरियाणा और उत्तर प्रदेश के किसानों के बीच आए दिन सीमा विवाद होता रहता है। हरियाणा के किसान अपनी और यूपी के किसान अपनी जमीन होने का दावा करते हैं। यूपी के कई किसानों ने चंडीगढ़ हाईकोर्ट में याचिका दायर की। हाईकोर्ट ने याचिकाओं पर एक साथ सुनवाई कर सर्वे ऑफ इंडिया को सीमांकन कर पिलर लगाने का आदेश दिया। यूपी के सहारनपुर से अलीगढ़ तक दोनों राज्यों की सीमा का सीमांकन होना है। हाईकोर्ट के आदेश पर गौतम बुद्ध नगर में सीमांकन का काम शुरू हो गया है। अफसरों ने बताया कि सोमवार को चक बसंतपुर गांव में पिलर लगाने का काम शुरू हुआ। कुल 65 किमी की दूरी में पिलर लगाए जाएंगे। यमुना नदी के अंदर पिलर लगाने के लिए गोताखोर और नाव का इंतजाम किया जा रहा है। साथ ही एनडीआरएफ टीम की भी मदद ली जाएगी।
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हरियाणा की सीमा से मिली है 32 गांवों की जमीन
गौतम बुद्ध नगर के 32 गांवों की जमीन हरियाणा की सीमा से लगी है। इनमें फलेदा खादर, झुप्पा, अमरपुर, सिरसा, पलाका, मकनपुर खादर, बेलाकला, गुलावली, चक बंसतपुर समेत अन्य गांव है। जहां दोनों राज्यों के किसानों के बीच आए दिन विवाद होते रहते हैं। सीमांकन होने के बाद विवाद खत्म हो जाएंगे।

कुछ बाढ़ में तो कुछ भूमाफिया ने उखाड़े पिलर


दोनों राज्यों की सीमा पर पिलर लगाने का काम पूर्व में भी हो चुका है, लेकिन ज्यादातर पिलर अपनी जगह से गायब हैं। कुछ पिलर बाढ़ में बह गए हैं। जबकि कुछ को भूमाफिया ने उखाड़ दिया है। वहीं, किसानों ने भी पिलर उखाड़े हैं। जिससे सीमा विवाद फिर से बढ़ गए।
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अब सेटेलाइट से जुड़े होंगे सभी पिलर

डिप्टी कलेक्टर भैरपाल सिंह ने बताया कि पूर्व में भी पिलर लगाए गए थे, लेकिन सर्वे ऑफ इंडिया की टीम उनको दस्तावेजों में दर्ज नहीं कर सकी। अब सभी पिलर सेटेलाइट से जुड़े होंगे। अगर पिलर को उखाड़ दिया जाता है तो सेटेलाइट की मदद से पिलर की निशानदेही पता कर ली जाएगी। फिर से निशानदेही करने की जरूरत नहीं होगी। दिसंबर तक पिलर लगाने का काम पूरा कर लिया जाएगा। पिलर लगाने में सर्वे ऑफ इंडिया के साथ हरियाणा और गौतम बुद्ध नगर प्रशासन की टीम भी लगी है। यूपी की तरफ से 2.23 करोड़ का भुगतान सर्वे ऑफ इंडिया को कर दिया गया है।
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