सपेरा समाज के लोगों ने शव रख 12 घंटे तक किया प्रदर्शन
शव दफनाने को नहीं है श्मशान भूमि, एसडीएम ने दिया लिखित आश्वासन
अस्थायी श्मशान घाट में कराया शव का अंतिम संस्कार, जल्द मिलेगी भूमि
संवाद न्यूज एजेंसी
दनकौर। श्मशान घाट नहीं होने पर सपेरा समाज के लोगों ने बुधवार को रीलखा गांव में शव रखकर करीब 12 घंटे तक प्रदर्शन किया। सूचना पर पहुंचे एसडीएम सदर ने श्मशान के लिए भूमि उपलब्ध कराने का लिखित आश्वासन दिया, साथ यमुना प्राधिकरण अधिकारियों से वार्ता कर जल्द ही श्मशान घाट बनवाने की बात कही। इसके बाद लोग शव का अंतिम संस्कार करने के लिए तैयार हुए और पड़ोस के अस्थायी श्मशान घाट में शव को दफनाया।
रीलखा गांव में सपेरा समाज के करीब दो सौ परिवार रहते हैं। उनका आरोप है कि समाज के किसी व्यक्ति की मौत होने पर शव दफनाने के लिए श्मशान भूमि उपलब्ध नहीं है। पहले उनके लिए श्मशान था मगर उसे प्राधिकरण ने अधिग्रहीत कर लिया और जल्द ही श्मशान घाट बनाने का आश्वासन दिया था। बुधवार तड़के बीमारी की वजह से गांव के धनिया नाथ (60) का निधन हो गया। परिजनों के सामने शव दफनाने के लिए श्मशान घाट की समस्या आई।
इस पर लोग शव को घर के बाहर रखकर श्मशान की भूमि मुहैया कराने को लेकर यमुना प्राधिकरण के खिलाफ धरना प्रदर्शन शुरू कर दिया। बद्री नाथ और कैलाश नाथ ने कहा, जब तक शव दफनाने के लिए भूमि चिह्नित नहीं की जाएगी, तब तक शव को घर पर ही रखेंगे। पुलिस व प्राधिकरण के अधिकारियों ने आश्वासन दिया, लेकिन लोग जिद पर अड़े रहे। मामले की गंभीरता को देखते हुए एसडीएम सदर अंकित कुमार पहुंचे और आश्वासन दिया कि जल्द ही उनकी समस्या का समाधान करा दिया जाएगा। एसडीएम ने प्राधिकरण सीईओ से वार्ता कर भूमि उपलब्ध कराने का लिखित आश्वासन दिया। इसके बाद लोग शव का अंतिम संस्कार करने को तैयार हुए।
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सपेरा समाज में शव दफनाने की है प्रथा
सपेरा समाज के लोगों का कहना है कि उनके यहां व्यक्ति के निधन के बाद शव को दफनाया जाता है, मगर उनके समाज के लोगों के लिए श्मशान घाट नहीं होने से अकसर इस तरह की समस्या आती है।
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सपेरा समाज की समस्या को लेकर जल्द ही प्रशासनिक अधिकारी यमुना प्राधिकरण के मुख्य कार्यपालक अधिकारी से मिलेंगे और समाधान कराएंगे। - मनीष कुमार वर्मा, जिलाधिकारी