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Noida News: नीचे लहलहा रहे धान, ऊपर बना दिए टीन के मचान

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नोएडा एयरपोर्ट... फोटो -
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नीचे लहलहा रहे धान, ऊपर बना दिए टीन के मचान

- दूसरे चरण की जमीन अधिग्रहण में अतिरिक्त मुआवजा हड़पने के लिए शुरू हुआ खेल

- धारा-11 लागू होने के बाद भी अधिग्रहित की जाने वाली जमीन पर हो रहा निर्माण

- निर्माण वाली जमीन का मिलेगा अतिरिक्त मुआवजा और विस्थापन साइट पर प्लाट

मनोज कुमार शर्मा
जेवर। नोएडा एयरपोर्ट निर्माण के लिए दूसरे चरण की 1181 हेक्टेयर जमीन के अधिग्रहण प्रक्रिया के बीच अतिरिक्त मुआवजा हड़पने के लिए खेल शुरू हो गया है। अधिग्रहित की जाने वाली जमीन पर धारा 11 की अधिसूचना के बाद भी यहां निर्माण किया जा रहा है। आलम है यह है कि कुछ खेत की जमीन में धान की फसल लहलहा रही है और ऊपर टीन शेड लगा दिए गए हैं। कुछ लोगों ने दोयम दर्जे की ईंट की मिट्टी में चिनाई करवाकर गाटर पत्थर व लेंटर डाल दिए हैं। ताकि दो गुना मुआवजा व निर्मित एरिया का 50 प्रतिशत विस्थापन साइट पर प्लाट हासिल किया जा सके। इससे राजस्व को तो नुकसान उठाना ही पड़ेगा, साथ ही एयरपोर्ट परियोजना की लागत भी काफी बढ़ जाएगी।

शासन के आदेश के बाद जिला प्रशासन जेवर के 6 गांव दयानतपुर, कुरैब, करौली बांगर, रन्हेरा, बीरमपुर व मुढरैह की 1181 हेक्टेयर जमीन किसानों से एयरपोर्ट के विस्तारीकरण के लिए अधिग्रहण कर रहा है। अधिग्रहण प्रक्रिया के दौरान धारा 11 लागू होने के बाद अधिसूचित जमीन पर किसी तरह का निर्माण कार्य व क्रय विक्रय जिलाधिकारी की अनुमति के बिना विशेष परिस्थितियों को छोड़कर नहीं किया जा सकता। लेकिन गांव नगला हुकमसिंह, नगला जहानू, नगला भामला, कुरैब व रन्हेरा गांव में अधिग्रहण प्रकिया शुरू होने के साथ ही नए निर्माण का खेल शुरू हो गया है। लोगों का आरोप है कि बाद में नए निर्माण के लिए मूल्यांकन टीम से सांठगांठ कर ली जाती है। इसके बाद इस तरह के निर्माण के मुआवजे के अलावा अन्य सुविधाओं के मिलने पर मुहर लग जाती है।
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कम लागत व समय की बचत के साथ टीन शेड का मुआवजा अच्छा

टीन शेड को खेत में खड़ी फसल के बीच बिना नुकसान के तैयार किया जा सकता है। इसका मुआवजा अच्छा मिलता है। इसलिए किसान ज्यादातर टीन शेड लगा रहे हैं। इसका मुआवजा प्रति वर्गमीटर 3 हजार से 8 हजार रुपये है। वहीं, गाटर पत्थर का 8 से 10 हजार रुपये वर्गमीटर और लेंटर पर 13 से 15 हजार रुपये प्रतिवर्गमीटर का मुआवजा है।

छत से लेकर छोटे मकानों का निर्माण कर बढ़ा रहे कवर्ड एरिया



विस्थापन वाले गांव के किसानों की खेती की जमीन की मुआवजा राशि भी बैंक खातों में पहुंच रही है। ऐसे में कुछ किसान अपने घर की छत पर निर्माण के अलावा मकानों के कवर्ड एरिया को बढ़ा रहे हैं। इसके लिए कुछ लोग सूद पर पैसा भी ले रहे हैं। ताकि मकानों का मूल्यांकन अधिक हो सके। नियम के मुताबिक जिस मकान का मूल्यांकन बनेगा उसका दो गुना मुआवजा प्रभावित किसान को देना होगा। साथ ही कवर्ड एरिया का 50 प्रतिशत प्लाट भी मिलेगा।
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यीडा को करनी होगी कार्रवाई नहीं तो बढ़ेगा वित्तीय भार



गांवों में निर्माण पर रोक लगाना और ध्वस्त करने का अधिकार यमुना प्राधिकरण को है। अगर ऐसे निर्माण को नहीं रोका गया या कार्रवाई नहीं हुई तो एयरपोर्ट परियोजना पर वित्तीय भार बढ़ जाएगा। वहीं, अगले चरण में 14 गांव की जमीन अधिग्रहण प्रक्रिया में और भी दिक्कतों का सामना करना पड़ेगा। जहां अधिसूचित होने के साथ ही नया निर्माण कार्य रफ्तार पकड़ रहा है।
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