जैन स्थानक में प्रवचन करते उपेंद्र मुनि। संवाद
- फोटो : हादसे में क्षतिग्रस्त बस।
संवाद न्यूज एजेंसी
समालखा। नई अनाज मंडी स्थित जैन स्थानक में उपेंद्र मुनि ने प्रवचनों में बड़ों की आज्ञा की पालन करना सबसे बड़ा धर्म बताया गया। उन्होंने कहा कि यह सम्मान, विनम्रता और सही मार्गदर्शन को दर्शाता है, जबकि बड़ों की सेवा को तप माना जाता है। जिससे कर्मों की निर्जरा होती है और व्यक्ति का विकास होता है। यह पालन तभी उचित है जब आज्ञा धर्म और नीति के विरुद्ध न हो, क्योंकि ऐसी अनुचित आज्ञा का पालन नहीं करना चाहिए। बड़ों की आज्ञा का पालन करना भारतीय संस्कृति का एक महत्वपूर्ण संस्कार और अनुशासन का प्रतीक है। बड़े जन हमें जीवन के अनुभवों के आधार पर सही राह दिखाते हैं और सही-गलत का अंतर सिखाते हैं। विद्यार्थी जीवन में गुरु की आज्ञा का पालन करना कर्तव्य है। जिससे ज्ञानार्जन और विकास होता है। बड़े गुणीजनों की सेवा करना तप के समान है।