- रूस की कंपनी ने भारत में पहली बार लगाया गया स्ट्रेन गेज सेंसर
- डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर पर न्यू बोड़ाकी जंक्शन के पास लगाया
अंकित कुमार
ग्रेटर नोएडा। अब 100 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से दौड़ रही मालगाड़ी का वजन लिया जा सकेगा। डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर के न्यू बोड़ाकी जंक्शन पर रूस की तकनीक पर आधारित नए स्ट्रेन गेज का सेंसर लगाया गया है। शुक्रवार को डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर कंपनी इंडिया लिमिटेड (डीएफसीसीआईएल) के अधिकारियों की मौजूदगी में लगाए गए नए सेंसर से न सिर्फ सही वजन नापा जा सकेगा बल्कि समय की भी बचत हो सकेगी। देश में पहली बार किसी ट्रेन रूट पर इस तरह के सेंसर का इस्तेमाल शुरू किया गया है। अहम है कि अभी तक मालगाड़ियों का वजन लेने के लिए उसकी रफ्तार 15 किमी प्रति घंटे करनी पड़ती है। साथ ही वजन भी औसत में लिया जाता है।
अब डीएफसीसीआईएल ने स्ट्रेन गेज सेंसर तकनीक के इस्तेमाल करने का फैसला लिया है। शुक्रवार को डीएफसीएसीआईएल के निदेशक नंदूरी श्रीनिवास ने रेल पटरी पर स्ट्रेन गेज सेंसर लगाने की शुरुआत की। शुक्रवार को इसका ट्रायल भी सफल रहा। नोएडा स्थित डीजे इंजीनियरिंग प्राइवेट लिमिटेड और रूस की एलएलसी स्टेटेरा की ओर से सेंसर तैयार किया गया है। सेंसर से मालगाड़ी में लदे लोहा, सीमेंट और कोयला आदि का वजन लिया जा सकता है।
पहले वजन करने के लिए मालगाड़ी की गति कम करनी पड़ती थी। मगर अब 100 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से दौड़ती मालगाड़ी का वजन हो सकेगा। भारत में यह पहली बार लगाया गया है। - अरुण कुमार वर्मा, अधिकारी,डीएफसीसी।
रेल की पटरी के दोनों तरफ लगे स्ट्रेन गेज सेंसर से वजन को तो मापा जा सकेगा,साथ ही सेफ्टी की दृष्टि से चोरी होने से भी रोका जा सकता है। अलग - अलग जगह लगे स्ट्रेन गेज सेंसर से वजन को नाप कर चोरी के खतरे को भी टाला जा सकेगा। - वेंकटेश चतुर्वेदी, डीएफसीसी।