नोटिस पर पेश नहीं हुए ग्रेनो प्राधिकरण के सीईओ
राष्ट्रीय उपभोक्ता आयोग का आदेश नहीं मानने का मामला
जिला उपभोक्ता आयोग ने जारी किया था समन, अधिवक्ता ने रखा प्राधिकरण का पक्ष
पीड़ित ने आदेश का पालन कराने की लगाई फिर से गुहार
संवाद न्यूज एजेंसी
ग्रेटर नोएडा। राष्ट्रीय उपभोक्ता आयोग आदेश के बाद भी भूखंड का आवंटन नहीं करने के मामले में जिला उपभोक्ता आयोग में बृहस्पतिवार को दोनों पक्षों की सुनवाई हुई। शिकायतकर्ता महेश मित्रा ने आयोग से आदेश के मुताबिक 2500 वर्गमीटर का औद्योगिक भूखंड 750 रुपये प्रति वर्गमीटर की दर से दिलाने और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की गुहार लगाई है। उनका कहना है कि इस संबंध में उनका किसी से समझौता नहीं हुआ है। प्राधिकरण समझौते की बात आयोग के समक्ष कहकर गुमराह कर रहा है। वहीं, प्राधिकरण के सीईओ को जिला उपभोक्ता आयोग ने धारा-27 उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम 1986 के आरोप का उत्तर देने के लिए 21 सितंबर 2023 को व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने के लिए कहा था, लेकिन उनकी जगह प्राधिकरण के अधिवक्ता ने अपना पक्ष रखा है।
मित्रा ने बताया कि वर्ष 2000 में प्रगति मैदान में ग्रेनो प्राधिकरण ने ‘पहले आओ पहले पाओ’ के आधार पर भूखंड योजना निकाली थी। 500 से 1000 वर्गमीटर के लिए आवेदन किया था। दर 750 रुपये वर्गमीटर थी। आवंटन के लिए 20 हजार रुपये जमा किए थे, लेकिन रुपये जमा करने के बाद भी प्राधिकरण ने भूखंड नहीं दिया। कई बार शिकायती पत्र देने के बाद सुनवाई नहीं की। मित्रा ने वर्ष 2005 में जिला उपभोक्ता आयोग का दरवाजा खटखटाया था।
इसके बाद वह राज्य और राष्ट्रीय उपभोक्ता आयोग भी गए। राष्ट्रीय उपभोक्ता आयोग ने मई 2014 को आदेश दिया कि उनको भूखंड आवंटन किया जाए, लेकिन आज तक इस आदेश का पालन नहीं किया गया है। करीब सात माह पहले आयोग ने प्राधिकरण की तत्कालीन सीईओ को एक माह की सजा सुनाई थी। आयोग के आदेश के बाद जवाब देने के लिए एक माह का समय मांगा था, फिर भी कोई कार्रवाई नहीं की गई।