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Noida News: सरकारी विज्ञापनों का बकाया 163 करोड़ चुकाने के लिए आप को नोटिस

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सूचना एवं प्रचार निदेशालय ने 10 दिन के अंदर बकाया जमा करने के निर्देश दिए
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तय दिशा निर्देशों का किया उल्लंघन, सरकारी की आड़ में राजनीतिक हितों को साधा


अमर उजाला ब्यूरो

नई दिल्ली। राजनीतिक दल के हितों को साधने के लिए सरकारी विज्ञापनों की आड़ में प्रकाशित विज्ञापनों के मद में बकाया 163.61 करोड़ रुपये जमा करने का सूचना एवं प्रचार निदेशालय (डीआईपी) ने आम आदमी पार्टी (आप) को वसूली का नोटिस भेजा है। नोटिस में 10 दिन के अंदर बकाया जमा करने के निर्देश दिए गए हैं। तयशुदा वक्त में बकाया राशि जमा नहीं करने पर उचित कार्रवाई की जाएगी। बकाये की अदायगी के लिए यह अंतिम मौका दिया गया है। विज्ञापनों के लिए सुप्रीम कोर्ट की तरफ से 2015 में जारी दिशा निर्देेशों की अनदेखी को आधार बनाते हुए यह कार्रवाई की गई है।

अजय माकन की शिकायत पर राजनीतिक हित के लिहाज से प्रकाशित विज्ञापनों के मद में खर्च राशि की वसूली के लिए तीन सदस्यीय कमेटी गठित की गई। इसे सुप्रीम कोर्ट के दिशा निर्देशों का उल्लंघन करार देते हुए वसूली करने को कहा गया था। माकन ने इसके बाद दिल्ली उच्च न्यायालय का रुख किया। उच्च न्यायालय ने सरकारी विज्ञापनों के लिए केंद्र सरकार की कंटेंट रेग्यूलेशन कमेटी को छह सप्ताह के अंदर माकन की शिकायत पर फैसला लेने का आदेश दिया। इसके बाद सितंबर 2016 में आम आदमी पार्टी ने कमेटी के समक्ष इस मामले में पुनर्विचार याचिका दाखिल की। इसके बाद डीआईपी की तरफ 30 मार्च, 2017 को आम आदमी पार्टी के संयोजक को नोटिस जारी किया गया। आम आदमी पार्टी ने इसे दिल्ली उच्च न्यायालय में चुनौती दी लेकिन उच्च न्यायालय ने वसूली मामले में कोई भी स्थगन आदेश देने से इन्कार कर दिया।
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सुप्रीम कोर्ट के दिशा निर्देशों को बनाया आधार

सूत्रों के मुताबिक, 2016-17 में आप ने सरकारी विज्ञापनों की आड़ में सरकारी खजाने से राजनीतिक विज्ञापन प्रकाशित करवाए। आप को भेजे गए वसूली नोटिस में सुप्रीम कोर्ट की 2015-2016 की गाइडलाइंस को आधार बनाया गया। इसके मुताबिक सरकारी विज्ञापनों में किसी पार्टी के हितों को प्रचारित नहीं किया जाना चाहिए। ऐसे विज्ञापनों में सत्ताधारी पार्टी के नाम के इस्तेमाल करने पर भी रोक है।


99.31 करोड़ रुपये मूल राशि, 64.31 करोड़ का ब्याज
डीआईपी ने आप के संयोजक अरविंद केजरीवाल को 163.61 करोड़ रुपये की वसूली का नोटिस भेजा है। इसमें 99.31 करोड़ रुपये मूल राशि है जबकि 64.31 करोड़ रुपये का ब्याज है। डीआईपी ने यह आदेश सरकारी विज्ञापनों के कंटेंट रेगुलेशन के लिए बनी कमेटी के आदेश के बाद दिया। सरकारी विज्ञापनों की आड़ में राजनीतिक हितों के लिहाज से प्रकाशित विज्ञापन से सरकारी खजाने को भी करोड़ों का नुकसान के आरोप लगाए गए थे।
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कंटेंट के लिए तय दिशा निर्देश

2015 में सर्वोच्च न्यायालय ने एक याचिका पर सुनवाई के दौरान सरकारी विज्ञापनों के कंटेंट के लिए गाइडलाइंस तय की थी। इसके तहत सरकारी विज्ञापनों में सत्ताधारी पार्टी के हितों को प्रचारित नहीं किया जाना चाहिए और न ही किसी नेता काे बढ़ा चढ़ाकर पेश किया जाना चाहिए। सरकारी विज्ञापनों में सत्ताधारी पार्टी का नाम, संकेत, झंडा या लोगो का भी इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए। साथ ही विपक्ष की राय या कार्यों पर सीधा हमला सहित सरकारी विज्ञापनों में राजनीतिक दलों या नेताओं की वेबसाइट्स का लिंक भी प्रकाशित नहीं किया जा सकता। इसके अलावा सरकारी विज्ञापनों में निजी, बौद्धिक संपदा, चुनावी कानूनों और उपभोक्ता संरक्षण कानून, कॉपीराइट एक्ट का भी ध्यान रखना चाहिए। सरकार एक लोकपाल नियुक्त करेगी और दिशा निर्देशों का उल्लंघन करने पर शिकायतों पर कार्रवाई की भी उनकी जिम्मेवारी होगी।
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