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Noida News: गाजियाबाद के लिए <bha>--</bha>- कदम ग्रुप, इंडिया बुल्स और एमथ्रीएम को जारी नोटिस

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कदम ग्रुप, इंडिया बुल्स और एमथ्रीएम को जारी नोटिस
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शिप्रा समूह की द्वारा कराई रिपोर्ट दर्ज का प्रकरण, यमुना प्राधिकरण ने आवंटन निरस्त कराने के जेपी इंफ्राटेक को भेजा पत्र

200 करोड़ का ट्रांसफर शुल्क के नुकसान का आरोप, जमीन पर है कदम का नाम दर्ज
गाजियाबाद के इंदिरापुरम थाने में अदालत के आदेश पर हुई थी नौ अप्रैल को 18 पर रिपोर्ट

माई सिटी रिपोर्टर
ग्रेटर नोएडा। नोएडा सेक्टर-128 में कदम समूह की जमीन को दूसरे समूह के बेचने के मामले में गाजियाबाद में रिपोर्ट दर्ज के बाद यमुना प्राधिकरण के अधिकारी हरकत में आ गए हैं। प्राधिकरण के मुख्य कार्यपालक अधिकारी ने जेपी इंफ्राटेक को पत्र भेजकर संबंधित समूह के आवंटन को निरस्त करते हुए रिपोर्ट दर्ज कराने के लिए भी कहा है।उक्त समूह ने प्राधिकरण की बिना अनुमति के जमीन को दो बार बेच दी है। जमीन के ट्रांसफर होने से प्राधिकरण को 200 करोड़ रुपये मिलने थे, मगर कुछ नहीं मिला है। साथ ही नोएडा प्राधिकरण को पत्र भेजकर नक्शा पास नहीं करने की अपील की गई है। यमुना प्राधिकरण प्राधिकरण ने कदम ग्रुप, इंडिया बुल्स और एमथ्रीएम को नोटिस जारी किया है।
प्रदेश सरकार ने यमुना एक्सप्रेसवे का विकास करने के एवज में जेपी इंफ्राटेक को पांच एलएफडी दी थी। इनमें 73 एकड़ की एक एलएफडी नोएडा सेक्टर-128 में है। इस एलएफडी में संपत्ति स्थानांतरित करने का अधिकार यमुना प्राधिकरण को है, जबकि नक्शा पास करने का अधिकार नोएडा प्राधिकरण को है। इस एलएफडी से 73 एकड़ जमीन कदम ग्रुप ने खरीदी थी।
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कदम और शिप्रा समूह दोनों का आपस में वेंचर है। इसमें शिप्रा के भी शेयर थे तो उन्होंने इस भूमि पर इंडिया बुल्स फाइनेंस लिमिटेड से ऋण ले लिया, मगर कुछ समय तक जब पैसा वापस नहीं लौटाया तो इंडिया बुल्स फाइनेंस लिमिटेड ने इस जमीन को एमथ्रीएम इंडिया प्राइवेट लिमिटेड को बेच दिया, जबकि यह जमीन अभी यमुना प्राधिकरण के दस्तावेज में कदम समूह के नाम ही दर्ज है। इसे लेकर शिप्रा समूह के अमित वालिया ने इंडिया बुल्स फाइनेंस लिमिटेड और एमथ्रीएम इंडिया के अधिकारियों समेत 18 लोगों पर नौ अप्रैल को रिपोर्ट दर्ज कराई।
रिपोर्ट दर्ज होने के बाद यमुना प्राधिकरण अधिकारियों को मामले का पता चला कि उनको समूह की ओर से जमीन को बेचने से 200 करोड़ का नुकसान हुआ है। इस पर यमुना प्राधिकरण के सीईओ डॉ. अरुणवीर सिंह ने मंगलवार को जेपी इंफ्राटेक को पत्र लिखकर एलएफडी को निरस्त करने और तीनों समूह के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराने के लिए भी कहा है। पत्र में उन्होंने कहा है कि यह संपत्ति अभी प्राधिकरण के दस्तावेज में कदम ग्रुप के ही नाम पर है। प्राधिकरण से बिना अनुमति लिए यह संपत्ति ट्रांसफर कैसे हो गई। साथ ही प्राधिकरण ने कदम ग्रुप, इंडिया बुल्स और एमथ्रीएम को नोटिस जारी किया है। जिसमें ट्रांसफर शुल्क जमा न करने की बात कही गई है। इसके अलावा प्राधिकरण को चेंज इन कांस्टीट्यूशन और चेंज इन शेयर होल्डिंग की सूचना भी नहीं दी है। जबकि यह सूचना देना जरूरी है और ऐसा न करने की प्रक्रिया अवैध है।

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यह है एलएफडी

एलएफडी से तात्पर्य लैंड फार डेवलपमेंट से है। यमुना एक्सप्रेसवे को पीपीपी मॉडल पर बनाया गया था। शासन ने जेपी इंफ्राटेंक को पांच एलएफडी दी गई थी। जेपी ने इनको विकसित करके बेचा और एक्सप्रेसवे के विकास में जो पैसा लगा था, उसे इसी से वापस लिया। इसके अलावा भूखंड समेत अन्य योजनाएं जेपी इंफ्राटेक ने दी थी।
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जेपी इंफ्राटेक का सेक्टर-128 स्थित एलएफडी यमुना प्राधिकरण के क्षेत्राधिकार में आता है, इसलिए ट्रांसफर यीडा से ही होता है और शुल्क भी वहीं पर जमा होगा। जमीन नोएडा में है, इसलिए नक्शा पास करने का अधिकार नोएडा प्राधिकरण के पास है। जमीन के दस्तावेज में अब भी कदम समूह का नाम है, जबकि इन्होंने आपस में इसे बेच दिया है। इस कारण तीनों कंपनियों को नोटिस दिया गया है। जेपी को भी पत्र लिखकर आवंटन निरस्त कराने व रिपोर्ट दर्ज कराने के लिए कहा गया है। - डॉ. अरुणवीर सिंह, सीईओ, यमुना प्राधिकरण
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